
New Delhi, 6 अगस्त . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा जेनजी और जेन अल्फा के छात्रों के साथ संवाद को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस और India आदिवासी पार्टी (बीएपी) के नेताओं ने इस पहल के समय और उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने इसे युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल बताया है.
कांग्रेस नेता रजनी मोहंती ने भी इस पहल पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश की लगभग 45 प्रतिशत आबादी जेनजी की है और यह वर्ग देश का सबसे ऊर्जावान तथा भविष्य का प्रतिनिधित्व करता है. आखिर अब जाकर आरएसएस नेतृत्व को युवाओं के साथ संवाद की आवश्यकता क्यों महसूस हुई. यदि संघ स्वयं को देश का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बताता है तो उसे पहले ही युवाओं से व्यापक स्तर पर संवाद करना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि यह पहल Political रूप से प्रेरित है और इसका उद्देश्य आरएसएस और भाजपा की छवि को बेहतर बनाना है. उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसे संवाद केवल एबीवीपी से जुड़े छात्रों तक सीमित रहेंगे और विभिन्न विचारधाराओं के छात्रों को समान अवसर नहीं मिलेगा.
एआईसीसी के उत्तर प्रदेश के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने मोहन भागवत के छात्रों से संवाद पर कहा कि उन्हें सबसे पहले देश के शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में नियुक्त किए गए कुलपति, रजिस्ट्रार और डीन जैसे पदों पर ऐसे लोगों की नियुक्ति की गई है, जिन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों को नुकसान पहुंचाया है.
राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि यदि वास्तव में युवाओं के भविष्य की चिंता है तो योग्य और सक्षम लोगों को विश्वविद्यालयों में जिम्मेदारी दी जानी चाहिए. यदि हर संस्थान में केवल संगठन से जुड़े लोगों की नियुक्ति होगी तो इससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी. शिक्षा के क्षेत्र में पार्टी राजनीति नहीं होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों को Political हस्तक्षेप से दूर रखा जाना चाहिए.
India आदिवासी पार्टी (बीएपी) के सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि आरएसएस का इतिहास ऐसा रहा है कि जब भी उसे परिस्थितियां बदलती दिखाई देती हैं तो वह अपने रुख में बदलाव करता है. हाल के विभिन्न घटनाक्रमों, विशेषकर पेपर लीक मामलों के बाद, संघ अपनी छवि सुधारने का प्रयास कर रहा है. पेपर लीक प्रकरण में जिन लोगों के नाम सामने आए, उनमें नागपुर और Rajasthan के सीकर से जुड़े लोग भी शामिल थे. इस मामले में की गई कार्रवाई केवल औपचारिक रही और इस पूरे मामले में बड़े लोगों की भूमिका होने की बातें भी सामने आई थीं. संघ और सत्ता से जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर देश का युवा सवाल पूछ रहा है.
उन्होंने आगे कहा कि यदि संघ वास्तव में आत्ममंथन कर रहा है और युवाओं के हित में बदलाव लाना चाहता है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए. आज का युवा जागरूक है और केवल बयानों से प्रभावित होने वाला नहीं है.
BJP MP दामोदर अग्रवाल ने मोहन भागवत के संवाद का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं की दिशा ही देश की दिशा तय करती है. उन्होंने कहा कि सरसंघचालक मोहन भागवत का संदेश पूरी तरह प्रेरणादायी और अनुकरणीय है. किसी भी देश को आगे बढ़ाने के लिए उसकी युवा पीढ़ी को केंद्र में रखना आवश्यक है. Prime Minister Narendra Modi भी लंबे समय से छात्रों और जेनजी के साथ संवाद करते रहे हैं और परीक्षा सहित विभिन्न विषयों पर उनसे चर्चा करते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी शाखाओं के माध्यम से बचपन से ही युवाओं में राष्ट्रभक्ति और नेशन फर्स्ट की भावना विकसित करने का कार्य करता रहा है. उन्होंने बताया कि वे स्वयं छठी कक्षा से संघ से जुड़े रहे हैं.
–
पीएसके