‘वंदे मातरम’ पर छिड़ी सियासी बहस, विपक्षी दलों ने कहा- भाजपा राष्ट्रभक्ति नहीं सिखाए

New Delhi, 20 अगस्त . कांग्रेस पार्टी द्वारा ‘वंदे मातरम’ के केवल दो पद गाए जाने के मुद्दे पर Political बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस नेताओं ने इसे संवैधानिक परंपरा से जुड़ा फैसला बताया है.

से बातचीत में कांग्रेस नेता नसीम खान ने कहा कि केवल दो पद गाने का फैसला कांग्रेस कार्यसमिति का नया निर्णय नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था पहले से जारी है. यह कांग्रेस पार्टी या कांग्रेस वर्किंग कमेटी का नया फैसला नहीं है. यह निर्णय 1937 में ही लिया जा चुका था. इस विषय पर 1950 में संविधान सभा की बैठक के दौरान भी निर्णय हुआ था. छह में से केवल दो पदों को मान्यता दी गई और तय किया गया कि देश में दो पद ही गाए जाएंगे.

नसीम खान ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से अपने कार्यक्रमों में दो पद गाती रही है. उन्होंने दावा किया कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली Government के दौरान भी 15 अगस्त और 26 जनवरी के अवसरों पर इसी परंपरा का पालन किया गया. उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस उसी व्यवस्था का पालन कर रही है, जिसे पहले ही मान्यता दी जा चुकी है.

आम आदमी पार्टी की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस वर्किंग कमेटी एक संवैधानिक संस्था है. उन्होंने कहा कि यदि संसद ने किसी विषय पर कानून बनाया है, तो उसका पालन होना चाहिए. अगर कांग्रेस केवल दो पद गाना चाहती है, तो वह अपने कार्यक्रमों में ऐसा कर सकती है. यदि उन्हें कानून पसंद नहीं है, तो चुनाव जीतकर उसे बदलने का प्रयास कर सकते हैं.

उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि कांग्रेस के बड़े और छोटे कार्यक्रमों में लंबे समय से ‘वंदे मातरम’ गाया जाता रहा है. उन्होंने आरएसएस और भाजपा से कहा कि यदि वे इस मुद्दे को लेकर इतने गंभीर हैं, तो उन्हें भी अपने सभी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य करना चाहिए.

Mumbai से कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का देश के स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा संबंध रहा है. कांग्रेस के अधिवेशनों में लंबे समय से ‘वंदे मातरम’ गाया जाता रहा है और आजादी की लड़ाई में शामिल अनेक नेताओं तथा स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे संघर्ष और राष्ट्रीय चेतना के प्रतीक के रूप में अपनाया. कांग्रेस को किसी से राष्ट्रभक्ति सीखने की जरूरत नहीं है. उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे के जरिए देश में नफरत फैलाने की राजनीति करने का आरोप लगाया.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ जैसे मुद्दे पर चर्चा करते समय देश के स्वतंत्रता आंदोलन और उस दौर के प्रमुख नेताओं की भूमिका को याद किया जाना चाहिए. क्या हम सरदार पटेल, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सी. राजगोपालाचारी, मौलाना अबुल कलाम आजाद और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की बात सुनेंगे या आज के नेताओं की. Government को विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों का सामना करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि Government हर मुद्दे पर बैकफुट पर है. उन्हें हमारे सवालों का जवाब देना चाहिए और सामने आकर उनका सामना करना चाहिए.

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने सवाल उठाया कि ‘वंदे मातरम’ का मुद्दा अचानक देश की सबसे बड़ी Political बहस कैसे बन गया. जब आजादी की लड़ाई के दौरान लोग ‘वंदे मातरम’ गाने के लिए जेल जा रहे थे, तब ये लोग कहां थे. हमें इतिहास को सही संदर्भ में देखने की जरूरत है.

डीकेएम/एबीएम

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