
Mumbai , 24 जुलाई . शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने Friday को कहा कि देशभर में नीट परीक्षा के पेपर लीक को लेकर बढ़ते जनाक्रोश और विरोध प्रदर्शनों के बाद Prime Minister Narendra Modi ने आखिरकार इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी है.
बढ़ते जनाक्रोश को संबोधित करते हुए Prime Minister मोदी ने कहा कि देश के छात्रों के हित और उनका भविष्य Government की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने इस मामले के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा कि “छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.”
Prime Minister ने दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने और कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित करने का भी वादा किया.
हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में Prime Minister की घोषणा के समय और तरीके पर सवाल उठाते हुए तीखी आलोचना की. पार्टी ने कहा कि Prime Minister मोदी ने संसद में इस मुद्दे पर बोलने या प्रदर्शन कर रहे छात्रों से सीधे संवाद करने के बजाय social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपना बयान जारी किया है.
संपादकीय में कहा गया कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पिछले महीनों से New Delhi के जंतर-मंतर पर छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में इस मुद्दे को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग को लेकर Police की लाठीचार्ज का भी सामना करना पड़ा है. इसमें कहा गया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने Prime Minister मोदी के आश्वासनों को “पेपर लीक पर केवल एक पट्टी” करार देते हुए फास्ट-ट्रैक अदालतों के वादे को “खोखली बयानबाजी” बताया है.
संपादकीय में कहा गया, “अगर Prime Minister फास्ट-ट्रैक अदालतों की घोषणा करने से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगते, तो उनके वादों में कुछ वजन नजर आता. हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ, जिससे उनके बयान सिर्फ ‘हवाई किले’ जैसे प्रतीत होते हैं. प्रदर्शन कर रहे छात्रों का संदेह जायज है. किसी को भरोसा नहीं है कि Prime Minister अपना वादा निभाएंगे. अपने 12 साल के कार्यकाल में उन्होंने या तो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप्पी साधी है या फिर अपने ही आश्वासनों को कमजोर किया है.”
संपादकीय के अनुसार, आलोचकों और विपक्ष का कहना है कि मोदी Government के पिछले एक दशक के कार्यकाल में पेपर लीक की 152 घटनाएं सामने आने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. 153वीं घटना और उसके बाद देशभर में भड़के भारी जनाक्रोश ने Government को प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर कर दिया. संपादकीय में Government के संकट से निपटने के तरीके को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए गए हैं.
संपादकीय में कहा गया, “Prime Minister ने इस पूरे मामले की प्राथमिक जिम्मेदारी संभाल रहे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा तक नहीं मांगा. एक ओर Government दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दे रही है, वहीं दूसरी ओर विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) लागू किया गया है, जिसकी सार्वजनिक असहमति से निपटने के Government के तरीके को लेकर तीखी आलोचना हो रही है.”
संपादकीय में कहा गया कि लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की उम्मीदों और सपनों के टूटने से जनता में असंतोष लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में आलोचकों को संदेह है कि Government की ये घोषणाएं वास्तव में ठोस सुधारों में बदलेंगी या फिर पहले की तरह सिर्फ अधूरे वादे बनकर रह जाएंगी.
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एसएके/पीएम