पीएम मोदी ने की डोमिनिकन समूह की सराहना, बोले- ‘दुनिया भारतीय संस्कृति को अपना रही है’

New Delhi, 28 जून . India के Prime Minister Narendra Modi ने मन की बात के 135वें एपिसोड में Sunday को कहा कि भारतीय संस्कृति धीरे-धीरे दुनिया भर में अपनी पहचान बना रही है. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोग India के संगीत, आध्यात्मिकता और पुरानी परंपराओं को अपना रहे हैं.

Prime Minister मोदी ने डोमिनिकन रिपब्लिक का एक उदाहरण देते हुए स्पैनिश बोलने वाले स्थानीय लोगों के एक समूह के बारे में बताया जो वैदिक साहित्य पढ़ने और वैदिक मंत्रों का जाप सीखने के लिए एक साथ आए हैं.

Prime Minister मोदी ने कहा, “आज भारतीय संस्कृति दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच रही है. हमारे गीत, संगीत और आध्यात्म को दुनिया-भर के लोग जान रहे हैं और अपना रहे हैं. India से हजारों किलोमीटर दूर कैरेबियाई सागर में डोमिनिकन रिपब्लिक नाम का एक देश है. वहां भारतीयों की संख्या करीब 100 है शायद इससे भी कम होगी. इसके बावजूद भारतीय संस्कृति और आध्यात्म से जुड़ा एक बहुत अच्छा प्रयास वहां हो रहा है.”

उन्होंने बताया कि वहां स्पेनिश भाषा बोलने वाले कुछ लोगों ने एक टीम बनाई है. इस टीम का नाम है, ‘ब्रहमकमल डोमिनिकाना’. टीम के सदस्य मिलकर वैदिक साहित्य का अध्ययन करते हैं. वे वैदिक मंत्रों का उच्चारण भी सीख रहे हैं. उन्हें इसकी कोई औपचारिक तौर पर प्रशिक्षण नहीं मिली है, लेकिन ऑडियो रिकॉर्डिंग्स सुनकर वैदिक मंत्रों का सही उच्चारण सीखा है. आज वे कई मंत्रों का बहुत अच्छे से जाप कर लेते हैं.

Prime Minister ने कहा, “इनमें पुरुष सूक्तम, श्री सूक्तम, श्री रुद्रम, दुर्गा सूक्तम और देवी महात्मयम शामिल हैं. India से इतनी दूर रहकर हमारी परंपराओं को सीखने का उनका यह प्रयास बहुत प्रेरक है. मैं ‘ब्रहमकमल डोमिनिकाना’ वहां के सभी सदस्यों को उनके प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देता हूं. मैं ऐसे सभी लोगों की हृदय से सराहना करता हूं जो भारतीय संस्कृति को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं.”

इसके अलावा, पीएम मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में मेघालय की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर ‘रूट ब्रिज’ की विशेष रूप से चर्चा की. उन्होंने कहा कि मेघालय की पहचान केवल उसके बादलों और प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां के ‘लिविंग रूट ब्रिज’ भी उसकी एक अनोखी और विश्व प्रसिद्ध पहचान हैं.

Prime Minister ने बताया कि ये रूट ब्रिज सामान्य पुलों की तरह नहीं होते, बल्कि इन्हें रबर के पेड़ों की जड़ों से तैयार किया जाता है. इन जड़ों को धीरे-धीरे दिशा देकर जलधाराओं के पार ले जाया जाता है और वर्षों की मेहनत व धैर्य के बाद ये मजबूत पुलों का रूप ले लेते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि ये प्रक्रिया कुछ दिनों या वर्षों में पूरी नहीं होती, बल्कि इसमें कई दशक लग जाते हैं. यही कारण है कि ये पुल प्रकृति और मानव के बीच गहरे संबंध का प्रतीक माने जाते हैं.

उन्होंने कहा कि ये रूट ब्रिज ‘जीवित पुल’ हैं, जो समय के साथ और अधिक मजबूत होते जाते हैं. इनमें मेघालय के लोगों की सृजनशीलता, धैर्य और प्रकृति के प्रति सम्मान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. Prime Minister ने कहा कि यह इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि मनुष्य और प्रकृति मिलकर कितनी अद्भुत और उपयोगी संरचनाएं बना सकते हैं.

पीएम मोदी ने बताया कि India ने मेघालय के इन रूट ब्रिजों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट नेटवर्क में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है.

केके/एएस

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