
अगरतला, 18 मई . त्रिपुरा के Chief Minister माणिक साहा ने Monday को यहां स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि Prime Minister Narendra Modi ने महिलाओं के Political और आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है.
Chief Minister ने कहा कि त्रिपुरा की मुख्यतः ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिला नेतृत्व वाले एसएचजी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जहां राज्य का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र है. इस प्रकार, ये एसएचजी राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.
साहा ने कहा कि जीएसडीपी के मामले में त्रिपुरा पूर्वोत्तर राज्यों में दूसरे स्थान पर है. उन्होंने आगे कहा कि राज्य के ग्रामीण और आंतरिक क्षेत्रों में 55,569 एसएचजी से 49 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हुई हैं और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयासरत हैं.
Chief Minister ने कहा कि त्रिपुरा में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 4.95 लाख महिला सदस्यों में से 1,08,281 महिलाएं विभिन्न उद्यमशीलता गतिविधियों में शामिल होकर ‘लखपति दीदी’ के रूप में उभरी हैं. ‘लखपति दीदी’ वह स्वयं सहायता समूह सदस्य होती है जिसकी वार्षिक पारिवारिक आय 1 लाख रुपए से अधिक होती है.
Chief Minister साहा ने कहा कि विभिन्न बैंकों ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को आजीविका संबंधी गतिविधियों को मजबूत करने के लिए 2,389 करोड़ रुपए के ऋण दिए हैं, जबकि राज्य Government ने परिचालित और सामुदायिक निवेश निधि के रूप में 837 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए हैं.
उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित India और विकसित त्रिपुरा के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पुरुषों और महिलाओं दोनों के संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं.
यह कार्यक्रम एसएचजी संबंधी गतिविधियों के लिए नोडल एजेंसी, त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन (टीआरएलएम) द्वारा यहां रवींद्र शताब्दी भवन में आयोजित किया गया था.
Chief Minister ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए समृद्धि 1.0 और 2.0 कार्यक्रम सफलतापूर्वक लागू किए गए हैं.
यह देखते हुए कि कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और ग्रामीण परिवारों की जीवनरेखा बनी हुई है, साहा ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के दृष्टिकोण के अनुरूप, विशेष रूप से एसएचजी सदस्यों के लिए आजीविका को मजबूत करने के लिए एकीकृत कृषि क्लस्टर (आईएफसी) दृष्टिकोण की अवधारणा तैयार की गई है.
उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में 80 अंतर्राष्ट्रीय वित्त परियोजनाओं के तहत 32 करोड़ रुपए के निवेश से गतिविधियां शुरू की जा चुकी हैं.
उन्होंने आगे कहा कि औसतन 250 से 300 छोटे और सीमांत किसानों को आजीविका सेवा केंद्रों से जोड़ा गया है, जो गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ बेहतर बाजार पहुंच भी प्रदान करते हैं.
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एमएस/