पप्पू यादव ने पीएम मोदी के पश्चिम बंगाल दौरे पर उठाए सवाल, पूछा-पहले के वादे पूरे हुए?

पूर्णिया, 20 दिसंबर . पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने Saturday को Prime Minister Narendra Modi के पश्चिम बंगाल दौरे पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी वो कई बार पश्चिम बंगाल जा चुके हैं, तब क्या हुआ?

पप्पू यादव ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि जब कभी इस देश में किसी राज्य में चुनावी बिगुल बजता है तो ये राजनेता चले जाते हैं. बिहार में भी इन लोगों ने कई तरह के लोकलुभावने वादे किए थे. उन वादों का क्या हुआ? क्या वे वादे पूरे हुए? बिहार का चुनाव पूरी तरह से नीतीश कुमार को जिताने के लिए ही था. इससे पहले ये लोग जम्मू-कश्मीर भी गए थे. क्या वहां पर किए गए वादे पूरे हुए?

निर्दलीय सांसद ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi इससे पहले पश्चिम बंगाल गए थे, जहां उन्होंने रविंद्रनाथ का रूप धारण कर लिया था. इससे पहले जब ये पंजाब गए थे, तो इन लोगों ने सिख का रूप धारण कर लिया था. जब Odisha गए थे, तो नवीन Patnaयक के ही Political अस्तित्व पर संकट आ गया था.

पप्पू यादव ने दावा किया कि बंकिम चटर्जी को ये लोग दादा बोल रहे हैं, जबकि इनके मंत्री इनका नाम भी नहीं ले पा रहे हैं. ये लोग कुछ भी टिप्पणी कर दे रहे हैं. पश्चिम बंगाल तो महात्मा गांधी को मानने वाली भूमि है. वहां पर लोग काली माता को मानते हैं. वहां पर सभी पापियों का नरसंहार करते हैं. रविंद्र नाथ टैगोर और महात्मा गांधी शांति के प्रतीक हैं. पश्चिम बंगाल में नफरत का कोई आधार नहीं है. ऐसी स्थिति में इन लोगों का पश्चिम बंगाल में कुछ नहीं होने वाला है. विवेकानंद ने वसुधैव कुटुंबकम की बात की. भाजपा ने सुभाष चंद बोस को कभी सम्मान नहीं दिया. ऐसी स्थिति में यही कहना है कि भाजपा का वहां पर क्या काम है.

पप्पू यादव ने कहा कि पश्चिम बंगाल में अप्रैल में विधानसभा के चुनाव होने हैं. ऐसी स्थिति में इस बात की पूरी प्रबल संभावना है कि आगामी दिनों में केंद्र Government की ओर से बजट में भी बंगाल ही बंगाल किया जाएगा. मैं समझता हूं कि इन लोगों को पश्चिम बंगाल के हितों से कोई लेना देना नहीं है.

वहीं, विकसित भारत-जी राम जी योजना पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राम जी प्रेम और मानवता के प्रतीक थे, लेकिन इन लोगों को कुछ पता नहीं है. इन लोगों ने मनरेगा की हत्या कर दी. इन लोगों ने आज तक किसी को रोजगार नहीं दिया. अगर मनरेगा की योजना नहीं होती, तो मजदूरों का कोरोना काल में बुरा हाल हो जाता. जिन लोगों ने आज तक अपने शासनकाल में 60 दिनों तक किसी को रोजगार नहीं दिया, वो लोग भला 125 दिनों तक किसी को कैसे रोजगार दे सकते हैं.

पप्पू यादव ने जी राम जी योजना में राज्य Government की ओर से 40 फीसदी योगदान देने पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि कौन सा बीमारू राज्य इन्हें 40 फीसदी का योगदान देगा. अब सभी राज्यों की हालत Maharashtra या कर्नाटक की तरह तो नहीं है. ऐसी स्थिति में 40 फीसदी योगदान देने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.

उन्होंने दावा किया कि मनरेगा की योजना में बदलाव करके इन लोगों ने गरीबों के पेट में लात मार दी. आप लोग आरक्षण को खत्म नहीं कर सकते थे, तो आपने नौकरियों को ही खत्म कर दिया. आप लोग दलित आदिवासियों का भला नहीं करना चाहते थे, तो आप लोगों ने एसआईआर का सहारा लेकर उनके अस्तित्व को ही खत्म करने का विचार कर लिया, जिसे अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

एसएचके/वीसी

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