
Lucknow, 24 जुलाई . कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने शंकराचार्य के कार्यक्रम की अनुमति से जुड़े विवाद, पेपर लीक मामलों पर पीएम मोदी की फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा, राम मंदिर ट्रस्ट के मुद्दों और केंद्र की बातचीत की पेशकश पर प्रतिक्रिया दी.
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाली पेपर लीक की घटनाओं पर Government की प्रतिक्रिया अपर्याप्त रही है और उन्होंने देश की परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद व्यवस्थागत खामियों को दूर करने में Government की विफलता का आरोप लगाया.
अखिलेश प्रताप सिंह ने से बातचीत में कहा, “ये सब बहाने हैं. पांच साल से ज्यादा समय से परीक्षा के पेपर लीक हो रहे हैं. राहुल गांधी ने बार-बार यह मुद्दा उठाया है और कहा है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पूरी प्रक्रिया में गंभीर कमियां हैं, जिन्हें ठीक करने की जरूरत है. Government ने इन समस्याओं पर ध्यान क्यों नहीं दिया? पेपर लीक के लिए उन्हीं के लोग जिम्मेदार हैं. मंत्री से इस्तीफा क्यों नहीं लिया जा रहा है? विरोध कर रहे छात्रों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया जा रहा है और इन मुद्दों को उठाने के लिए पूरे विपक्ष को परेशान किया जा रहा है. जब भी विपक्ष अपनी मांगें रखना चाहता है, तो संसद को ठीक से काम नहीं करने दिया जाता.”
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के कार्यक्रम की अनुमति से जुड़े विवाद पर अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा, “जब भी मुझे मौका मिलता है, मैं शंकराचार्य महाराज से जरूर मिलता हूं, चाहे मैं अपने जिले में हों, Lucknow में या आस-पास कहीं भी. अगर वे वहां होते हैं, तो मैं हमेशा उनका आशीर्वाद लेने जाता हूं. इससे मुझे बहुत शांति और खुशी मिलती है. वे हमारे सम्मानित धार्मिक गुरु हैं और हम उन्हें भगवान शिव का स्वरूप मानते हैं. मैं उनका आशीर्वाद पाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहता, इसीलिए जब भी संभव हो, मैं उनसे जरूर मिलता हूं. Government ने शंकराचार्य के कार्यक्रम को अनुमति न देकर कायरतापूर्ण हरकत की है.”
अखिलेश प्रताप ने कहा, “धर्म के लिए क्या उचित है, यह शंकराचार्य से बेहतर कोई और नहीं जानता. अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गौहत्या बंद करने के लिए जनजागृति कर रहे हैं, लोगों से मिल रहे हैं और Government पर दबाव बना रहे हैं. शंकराचार्य तो अपना धर्म निभा रहे हैं लेकिन हिंदू धर्म की बात करने वाली Government उनके कार्यक्रम को अनुमति क्यों नहीं दे रही है?
राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति पर कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा, “यह पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है. जब से राम मंदिर ट्रस्ट बना है, शंकराचार्यों ने इसमें अहम भूमिका निभाई है. कोर्ट के सामने शंकराचार्यों द्वारा पेश किए गए सबूतों, दस्तावेजी रिकॉर्ड और धार्मिक ग्रंथों के हवाले के आधार पर ही हमारे पक्ष में फैसला आया था. उस फैसले के बाद ही मंदिर का निर्माण शुरू हुआ. ट्रस्ट साधु-संतों और शंकराचार्यों का होना चाहिए. पूरा ट्रस्ट भंग करके साधु-संतों को शामिल किया जाना चाहिए.”
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ओपी/एएस