काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बाघ का शव मिलने से हड़कंप, जांच शुरू

गुवाहाटी, 31 मई . काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य में एक उप-वयस्क (सब-एडल्ट) बाघ का शव मिलने के बाद वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों ने Sunday को बताया कि बाघ का शव उद्यान के मिहीमुख क्षेत्र से बरामद किया गया.

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व (केएनपीटीआर) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, करीब चार दिन पुराना यह शव Saturday शाम को कोहारा स्थित काजीरंगा रेंज के मिहीमुख क्षेत्र में नियमित निगरानी और गश्त के दौरान वनकर्मियों को मिला.

शव मिलने के बाद पार्क प्रशासन ने उसका निरीक्षण किया और वन्यजीव संरक्षण नियमों के तहत आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू कीं. बाघ की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है.

अधिकारी ने बताया कि केएनपीटीआर की निदेशक सोनाली घोष ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार पोस्टमार्टम और शव के निस्तारण के लिए एक समिति का गठन किया था. बाघ का पोस्टमार्टम Sunday को किया गया.

हालांकि, अधिकारियों के अनुसार शव काफी अधिक सड़-गल चुका था, जिसके कारण पोस्टमार्टम के दौरान मौत के कारणों का पता नहीं चल सका.

गौरतलब है कि इस वर्ष जनवरी और फरवरी में भी काजीरंगा में तीन बाघों के शव बरामद किए गए थे.

7 फरवरी को बुरापहाड़ रेंज के घोराकाटी क्षेत्र में एक 12 से 13 वर्षीय नर बाघ का शव मिला था. प्रारंभिक जांच में बाघों के बीच संघर्ष (इन्फाइटिंग) को उसकी मौत का कारण माना गया था.

वहीं, 18 जनवरी को बागोरी पश्चिमी रेंज के कथपोरा क्षेत्र से तीन से चार वर्ष की एक बाघिन का शव मिला था. प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत भी आपसी संघर्ष के कारण होने की आशंका जताई गई थी.

इसके अलावा 14 जनवरी को बिस्वनाथ वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत गामिरी के थुटे चापोरी क्षेत्र में दो से तीन वर्ष के एक युवा रॉयल बंगाल टाइगर का शव मिला था. पशु चिकित्सकीय जांच में उसकी मौत प्राकृतिक कारणों या संघर्ष के चलते होने की संभावना जताई गई थी.

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान India के प्रसिद्ध ‘बिग फाइव’ वन्यजीवों का घर माना जाता है. नवीनतम आंकड़ों के अनुसार यहां 2,613 एक सींग वाले गैंडे, 104 बंगाल टाइगर, 1,228 एशियाई हाथी, 2,565 जंगली भैंसे और 1,129 पूर्वी दलदली हिरण पाए जाते हैं.

गोलाघाट, नगांव, सोनितपुर और बिस्वनाथ जिलों में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान ने वर्ष 2024-25 में 10.90 करोड़ रुपये से अधिक और 2023-24 में 8.81 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया था.

डीएससी

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