सऊदी अरब-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की खामोशी ने रक्षा समझौते पर खड़े क‍िए सवाल : र‍िपोर्ट

इस्लामाबाद, 22 मार्च . Pakistan की विदेश नीति पर एक हाल‍िया र‍िपोर्ट ने सवाल उठाए हैं. Pakistan और सऊदी अरब के बीच ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ (एसएमडीए) जैसे रक्षा समझौते मौजूद हैं. इसके बावजूद सऊदी अरब में ईरानी हमलों पर इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया शांत बनी हुई है.

द यूरेशियन टाइम्स में प्रकाशित एक लेख में सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने लिखा कि दशकों से सऊदी अरब की ओर से वित्तीय और रणनीतिक समर्थन मिलने के बावजूद Pakistan ईरान को ‘खुश करने’ की नीति अपनाए हुए है.

लेख में कहा गया है, “यह ध्यान देने योग्य है कि सऊदी अरब और Pakistan के संबंध सात दशकों से अधिक पुराने हैं. सऊदी सुरक्षा के लिए Pakistanी सैन्य कर्मियों की तैनाती वर्षों से एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में स्थापित रही है. इसके अलावा, सऊदी अरब में लाखों Pakistanी नागरिक काम कर रहे हैं, जो इस्लामाबाद की विदेशी मुद्रा आय में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.”

द यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान से बार-बार हमलों का सामना करने के बाद सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने चेतावनी दी कि ईरानी आक्रामकता के सामने किंगडम का संयम ‘असीमित नहीं है’, जिसका अर्थ है कि सैन्य कार्रवाई अभी भी एक विकल्प हो सकता है. इस बीच अरब और इस्लामिक देशों ने एक संयुक्त बयान में तेहरान से अपनी आक्रामकता रोकने का आग्रह किया.

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच, ईरान के President मसूद पेजेश्कियान ने 7 मार्च को सार्वजनिक रूप से पश्चिम एशिया के देशों के खिलाफ हुई आक्रामक कार्रवाइयों के लिए माफी मांगी. इसके बावजूद, रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले जारी रखे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि तेहरान का उद्देश्य न केवल इजरायल को नुकसान पहुंचाना है, बल्कि पश्चिम एशिया के देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी उनके महत्वपूर्ण अवसंरचना को निशाना बनाकर प्रभावित करना है.

युद्ध के दौरान सबसे अधिक प्रभावित खाड़ी देशों में सऊदी अरब, यूएई और कतर शामिल हैं, जबकि दोहा ने कथित तौर पर हमास, हिज़्बुल्लाह और हूती जैसे ईरानी प्रॉक्सी समूहों का समर्थन करने में धन खर्च किया है, जिसका उद्देश्य इजरायल पर लगातार दबाव बनाए रखना बताया गया है.

इस बीच, यूएई के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री सुल्तान अल जाबेर ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा अवसंरचना पर हमले उनके संचालन को प्रभावित कर रहे हैं और तनाव बढ़ने पर इसके गंभीर प्रभाव हो सकते हैं.

ईरान के बढ़ते हमलों के बीच कतर के विदेश मंत्रालय ने कई ईरानी राजनयिकों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ (अवांछित व्यक्ति) घोषित किया है. रिपोर्टों के अनुसार, यूएई में बड़ी संख्या में ईरानी नागरिक, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और बासिज के सीक्रेट मेंबर्स शामिल हैं, Government के खिलाफ अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.

लेख में यह भी कहा गया है कि ईरानी ऑपरेटिव्स यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब में Pakistanी नागरिकों को भर्ती कर इन देशों और उनके नेतृत्व के खिलाफ ऑनलाइन प्रोपेगेंडा अभियान चलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. इससे पहले, तुर्की की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने एक खोजी रिपोर्ट में बताया था कि Pakistan-आधारित नेटवर्क social media प्लेटफॉर्म पर एआई-आधारित ईरानी प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं.

एवाई/एबीएम

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