
काबुल, 7 मई . India का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण था कि Pakistan की रक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं निकली जितना दावा किया जाता था.
एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल India के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान, जब Pakistan के रक्षा प्रणालियों को रियल-टाइम टारगेटिंग, एकीकृत वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विरुद्ध परखा गया तो वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे.
अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट में कहा गया कि आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से यह उम्मीद नहीं होती कि वह हर हमला रोक दे, लेकिन उससे कम से कम अहम सैन्य ठिकानों को बार-बार और एक साथ होने वाले हमलों से बचाने की उम्मीद जरूर की जाती है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान Pakistan ऐसा करने में नाकाम रहा.
रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय हमलों से Pakistan के एयरफील्ड, हैंगर और रडार सिस्टम को काफी नुकसान पहुंचा.
रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan का एचक्यू-9 लंबी दूरी वाला सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया. इसे चीन के एक हाई-एंड सिस्टम के तौर पर पेश किया गया था, जो पश्चिमी और रूसी सिस्टम को टक्कर देने वाला माना जाता था. माना जा रहा था कि यह भारतीय एयर ऑपरेशंस को मुश्किल बना देगा और रणनीतिक एयर बेस की रक्षा करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
Pakistan और चीन ने मिलकर विकसित किया जेएफ-17 मल्टीरोल फाइटर विमान भी कमजोर साबित हुआ. रिपोर्ट में कहा गया कि यह भारतीय हमलों को संवेदनशील सैन्य ठिकानों तक पहुंचने से नहीं रोक पाया. साथ ही शुरुआती हवाई लड़ाई के बाद भारतीय एयरबेस को किसी बड़े नुकसान का कोई साफ सबूत भी सामने नहीं आया.
रिपोर्ट में कहा गया, “जिस विमान को Pakistan की सस्ती और मजबूत एयर पावर की रीढ़ बताया जाता था, उसके लिए यह प्रदर्शन भरोसा बढ़ाने वाला नहीं था.”
जे-10सी लड़ाकू विमान और पीएल-15 लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल के बारे में भी रिपोर्ट में कहा गया कि इनके किसी बड़े सामरिक सफलता के पक्के सबूत नहीं मिले. Pakistan की तरफ से किए गए दावों को समर्थन देने वाला कोई ठोस सबूत अंतरराष्ट्रीय मीडिया में साझा नहीं किया गया.
रिपोर्ट में कहा गया कि जे-10सी की कथित ‘रणनीतिक सफलता’ अब तक बड़े निर्यात में नहीं बदली है. पेंटागन की 2025 की चीन सैन्य रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि Pakistan अभी तक जे-10सी का इकलौता विदेशी ग्राहक बना हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक, Pakistan लंबे समय से चीनी सैन्य उपकरणों के परीक्षण के लिए एक ‘भरोसेमंद प्रयोगशाला’ की तरह काम करता रहा है, और उनकी कमियों का असर भी उसे ही झेलना पड़ा है.
रिपोर्ट में कहा गया कि Pakistan के सैन्य उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार भरोसे की कमी का सामना करना पड़ रहा है. ऑपरेशन सिंदूर ने सिर्फ कुछ सिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि Pakistan के इस दावे को भी कमजोर कर दिया कि उसकी रक्षा व्यवस्था पूरी तरह भरोसेमंद और युद्ध के लिए तैयार है.
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एवाई/डीकेपी