9 फरवरी के बाद देश में नहीं बिकेंगी पाकिस्तानी दवाएं : अफगानिस्तान

New Delhi, 21 जनवरी . अफगानिस्तान ने Wednesday को पड़ोसी मुल्क के खिलाफ बड़ा फैसला लिया. ऐलान किया कि Pakistan से आयातित दवाएं 9 फरवरी के बाद देश में नहीं बेची जाएंगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने व्यापारियों से डेडलाइन से पहले सभी संबंधित कमर्शियल लेनदेन पर विराम लगाने की अपील की है.

काबुल के पझवोक न्यूज ने अफगानिस्तान के वित्त मंत्रालय (एमओएफ) के हवाले से बताया कि इस संबंध में पहले लिए गए फैसले के लागू होने में सिर्फ 19 दिन बचे हैं, जिसके बाद Pakistan से आयात की गई दवाओं को किसी भी हालत में प्रोसेस नहीं किया जाएगा, साथ ही बताया कि व्यापारियों से इस अवधि के भीतर सभी पेंडिंग लेनदेन को पूरा करने का आग्रह किया गया है.

इसमें आगे कहा गया है कि 13 नवंबर, 2025 को एमओएफ ने घोषणा की थी मंत्री के निर्देशानुसार तीन महीने बाद Pakistan से आयात की गई दवाओं को कस्टम्स के माध्यम से प्रोसेस नहीं किया जाएगा.

जमीनी रिपोर्टों से पता चलता है कि 2025 के अंतिम दिनों से अफगानिस्तान-Pakistan व्यापार मार्ग बंद होने के बाद दोनों देशों के बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव और कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है.

11 अक्टूबर को हुई भीषण गोलीबारी के बाद दोनों देशों के बीच युद्धविराम समझौते की कोशिश हुई, जो असफल रही.

डूरंड रेखा, काबुल और इस्लामाबाद के बीच विवाद का हमेशा विषय रही है, और 2,600 किमी लंबी सीमा पर विभिन्न मोर्चों पर कई झड़पें हुई हैं.

लैंडलॉक्ड देश अफगानिस्तान व्यापार के लिए सीमा द्वारों पर बहुत अधिक निर्भर है, जो इसे अन्य देशों को सामान भेजने के लिए Pakistan में कराची और ग्वादर बंदरगाहों तक पहुंच प्रदान करता है. दूसरा व्यापार मार्ग पश्चिम में ईरानी सीमा से होकर जाता है.

यह घोषणा काबुल और इस्लामाबाद के बीच बिगड़ते संबंधों के बीच अस्थिरता को और बढ़ाने वाली है.

लगभग तीन महीने पहले, तालिबानी सेना ने अशांत सीमा पार हमला किया था. काबुल ने दावा किया कि यह Pakistanी बलों द्वारा कथित तौर पर अफगान क्षेत्र में हवाई हमले करने के बाद जवाबी कार्रवाई की थी.

क्षेत्रीय मध्यस्थ भी दोनों देशों के बीच समझौता कराने में असफल रहे हैं.

कतर, सऊदी अरब और तुर्की ने काबुल और इस्लामाबाद के बीच कई बार बातचीत कराने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला.

Wednesday की पझवोक रिपोर्ट में तालिबान Government के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के हवाले से कहा गया है कि Pakistanी प्रतिनिधिमंडल के सहयोग की कमी और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार ने तुर्की में बातचीत की सफलता में बाधा डाली थी, जबकि अफगानिस्तान की सद्भावना और उसके मध्यस्थों ने भरपूर प्रयास किया था.

इस बीच, पिछले साल 12 नवंबर को, आर्थिक मामलों के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने व्यापारियों और उद्योगपतियों से Pakistan पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक व्यापार मार्गों का पता लगाने का आह्वान किया था.

उन्होंने चेतावनी दी कि काबुल Pakistanी रास्तों पर लगातार निर्भरता से होने वाली किसी भी समस्या का समाधान नहीं करेगा. बरादर ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद ने बार-बार व्यापार मार्ग बंद किए हैं और कमर्शियल मामलों का Politicalरण किया है, जिससे दोनों देशों के व्यापारियों और उद्योगों को काफी नुकसान हुआ है, जिसके बाद ही काबुल ने ये फैसला लिया है.

केआर/

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