पाकिस्तान चीन का क्लाइंट है, आतंकी संगठनों को विदेश नीति के तौर पर कर रहा यूज: पूर्व अमेरिकी एनएसए (आईएएनएस साक्षात्कार)

वॉशिंगटन, 22 अप्रैल . अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने के लिए Pakistan के ऑफर पर पूर्व अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर एच आर मैकमास्टर ने गंभीर संदेह जताया है. पूर्व अमेरिकी एनएसए ने Wednesday को इस्लामाबाद पर सुरक्षा सहयोग में डुअल-ट्रैक अप्रोच अपनाने का आरोप लगाया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि Pakistan को निश्चित रूप से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) का क्लाइंट माना जाना चाहिए.

पूर्व एनएसए मैकमास्टर से न्यूज एजेंसी ने खास इंटरव्यू में पूछा कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में Pakistan की क्या भूमिका है, तो इस पर उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि आपको Pakistan को पक्का चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का क्लाइंट मानना ​​होगा.”

मैकमास्टर बदलते ग्लोबल ऑर्डर का साफ-साफ अंदाजा लगाया, जिसमें ईरान, चीन, Pakistan और अमेरिका-India संबंधों की दिशा पर बात की गई. उन्होंने Pakistan की विश्वसनीयता पर बात की और अमेरिका-India संबंधों को मुश्किल लेकिन जरूरी बताया. इसके साथ ही उन्होंने चीन को चुनौती बताया और ऊर्जा सुरक्षा और भू-Political अलाइनमेंट के आसपास बढ़ती कमजोरियों की चेतावनी दी.

सवाल: ईरान युद्ध और Pakistan के जरिए हो रही बातचीत के बारे में बहुत सारी बातें हो रही हैं. India में, बहुत से लोग मानते हैं कि Pakistan एक भरोसेमंद साझेदार नहीं हो सकता क्योंकि बॉर्डर पार से आने वाले आतंकवाद का हमारा अनुभव रहा है और अमेरिका ने भी यह देखा है. आप इसे पूरे संदर्भ में कैसे देखते हैं? क्या Pakistan पर भरोसा किया जा सकता है?

जवाब: मुझे लगता है कि आपको Pakistan को पक्का चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का क्लाइंट मानना ​​होगा. इससे इस मामले में उन्हें कॉम्प्रोमाइज करना पड़ता है क्योंकि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी, मुझे यकीन है, ईरान में इस्लामिक रिपब्लिक, थियोक्रेटिक डिक्टेटरशिप को पावर में बनाए रखने के लिए बेताब है. इसलिए मुझे लगता है कि इन बातचीत में बीच-बचाव करने के लिए अपनी अच्छी जगह देने के पीछे शायद कोई छिपा हुआ मकसद है. Pakistanी आर्मी के साथ मेरा अनुभव बहुत निराशाजनक रहा है, और समय के साथ मैंने यह माना है कि Pakistan अक्सर आपका दोस्त बनने और मदद करने की पेशकश करता है, जैसे, अल-कायदा या तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ काउंटर-टेररिज्म कोशिशों में, जबकि उसी समय वे आपके दुश्मनों का समर्थन कर रहे होते हैं. जैसा कि India अच्छी तरह जानता है कि वे (Pakistan) 1940 के दशक के आखिर से ही आतंकी संगठन को अपनी विदेश नीति के एक हिस्से के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं.

सवाल: आप एनर्जी संकट को इसके बड़े संदर्भ में कैसे देखते हैं, यह देखते हुए कि India का इंपोर्ट भी मिडिल ईस्ट से होता है?

जवाब: यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के बड़े हमले से जुड़े एनर्जी संकट जैसा ही है. इसलिए मुझे लगता है, यह एनर्जी सिक्योरिटी की जरूरत को दिखाता है. India के साथ अमेरिका की साझेदारी कई स्तर पर बहुत जरूरी है, लेकिन मुझे लगता है कि उस संबंध का सबसे जरूरी पहलू साझेदारी होना चाहिए, दूसरे देशों के साथ भी साझेदारी ताकि ऐसी तकनीकी विकास की जा सकें और ऐसी तकनीक लागू की जा सकें जो ऊर्जा सुरक्षा को बहुत ज्यादा बढ़ा सकें, साथ ही India के सामने पानी की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में आने वाली दूसरी चुनौतियों का भी सामना कर सकें. मैं इन सभी को आपस में जुड़ा हुआ देखता हूं और मुझे अमेरिका के लिए India के साथ एनर्जी सॉल्यूशन की एक बड़ी रेंज पर काम करने के बहुत सारे मौके दिखते हैं, जिसमें शामिल हैं, उदाहरण के लिए अमेरिकी लिक्विफाइड नेचुरल गैस एक्सपोर्ट तक पहुंच, अपने एनर्जी सोर्स को अलग-अलग तरह का बनाना, शायद अमेरिका से ज्यादा खरीदना, जो अब दुनिया का सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन प्रोड्यूसर है, लेकिन साथ ही ऐसे रिन्यूएबल सॉल्यूशन भी जो चीन द्वारा कंट्रोल की जाने वाली सप्लाई चेन पर निर्भर न हों. उदाहरण के लिए, ये विंड टर्बाइन और सोलर पैनल हैं. और भविष्य में, आपके पास ऐसी न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी होंगी जिनमें बहुत उम्मीदें हैं, जैसे छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर या ईएम स्क्वेयर्ड रिएक्टर.

सवाल: आप दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच संबंधों के बड़े समर्थक रहे हैं. दूसरे टर्म में यह कैसे बदला है?

जबाव: मैं यही कहूंगा कि यह मुश्किल रहा है. मेरे हिसाब से इसे इतना मुश्किल होने की जरूरत नहीं थी. यह बुरा था कि संबंधों में तनाव तब साफ हो गया जब President ट्रंप को लगा कि उन्हें India और Pakistan के बीच सीमा पर तनाव कम करने और हाल की लड़ाई का पूरा क्रेडिट नहीं मिला. लेकिन फिर, व्यापार के मुद्दे हमेशा से ही थोड़े पेचीदा रहे हैं. लेकिन हम उन पर मिलकर काम कर सकते हैं. हमें एक-दूसरे की जरूरत है. हमें अपने भारतीय साझेदारों को यह भरोसा दिलाकर बीच का रास्ता निकालने की जरूरत है कि, अमेरिका आगे चलकर India के लिए सबसे जरूरी साझेदार होना चाहिए. अमेरिका और India कई तरह से एक-दूसरे की समस्याओं का समाधान हैं, चीनी हमले के खतरे के मामले में. हमें याद रखना होगा, ज्यादा समय नहीं हुआ जब चीनी सैनिक हिमालय की सीमा पर भारतीय सैनिकों पर हमला कर रहे थे. और चीन अभी भी कई तरह के विध्वंसक काम और आर्थिक हमले कर रहा है, जिससे अमेरिका और India और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं जापान और ईयू को निPatna चाहिए, हम सभी को आम समस्याओं और चुनौतियों पर मिलकर काम करना चाहिए.

सवाल: President ट्रंप एक महीने से भी कम समय में चीन जाने वाले हैं. इस मामले में आप यूएस-चीन के संबंध को कैसे देखते हैं?

जवाब: मुझे लगता है कि आपको व्यापार और आर्थिक तनाव में थोड़ी राहत, थोड़ी देर के लिए ठहराव मिल सकता है. लेकिन यह उससे ज्यादा नहीं होगा क्योंकि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का स्वाभाव, उसके नेताओं को चलाने और रोकने वाली आइडियोलॉजी और उसके मर्केंटिलिस्ट इकोनॉमिक सिस्टम का नेचर हमारी फ्री मार्केट इकॉनमी के साथ पूरी तरह से मेल नहीं खाता. इसलिए, मैं इसे शायद तानव में थोड़ी राहत के तौर पर देखता हूं, लेकिन उन बुनियादी मतभेदों के पीछे की गंभीरता या वजन बना रहेगा. जो सच में जरूरी है वह मिडिल ईस्ट में नतीजा होगा. मुझे लगता है, चीन ने जो किया है वह ईरान को उनके तेल की खरीद में समर्थन करना है. वे ईरान के 90 फीसदी तेल को ईरानी Government के एटीएम में डालने के लिए खरीदते हैं और वे उस कैश का इस्तेमाल पूरे इलाके में आतंकवादियों को समर्थन करने के लिए करते हैं. और जैसा कि हमने देखा है कि उन्होंने एक बहुत बड़ा मिसाइल, ड्रोन स्ट्राइक कॉम्प्लेक्स बनाया है, जिसे उन्होंने मिडिल ईस्ट के 14 देशों के खिलाफ इस्तेमाल किया है. और इसलिए चीन ईरानियों का मुख्य क्लाइंट रहा है. अगर ईरानी Government में कोई बड़ा बदलाव होता, ऐसा बड़ा बदलाव कि वह यूएस, इजरायल और अपने अरब पड़ोसियों से अपनी हमेशा की दुश्मनी खत्म कर दे, तो मिडिल ईस्ट में चीन को बहुत नुकसान होगा. जो होगा, वह यह है कि चीन के हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हमला करने की संभावना बहुत कम है. इसीलिए मुझे लगता है कि India और सभी देश जो इंडो-पैसिफिक इलाके और उससे आगे शांति और सुरक्षा चाहते हैं, उन्हें इस्लामिक रिपब्लिक को सच में खत्म करने के पक्ष में होना चाहिए, जैसा कि हम उसे जानते हैं, जैसा उसने किया था. मेरा मतलब है, हमें यह मानना ​​होगा, मेरा मतलब है वे 47 सालों से अमेरिका, इजरायल और अपने अरब पड़ोसियों के खिलाफ एक प्रॉक्सी वॉर चला रहे हैं.

केके/डीएससी

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