
New Delhi, 11 जुलाई . भारत-न्यूजीलैंड के बीच रणनीतिक साझेदार और समुद्री सहयोग पर विदेश मंत्रालय (एमईए) के सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि India हिंद महासागर का देश है और अपने आसपास के समुद्री क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है. उन्होंने कहा कि प्रशांत महासागर का क्षेत्र India के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान टंडन ने कहा, “India हिंद महासागर का देश है. हम आसपास के समुद्री क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह सतर्क रहते हैं. प्रशांत महासागर हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है और हमने हमेशा न्यूजीलैंड को इस क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण तथा समान सोच वाली शक्ति के रूप में देखा है.”
उन्होंने कहा कि Prime Minister क्रिस्टोफर लक्सन ने भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में नई ऊर्जा भरने के लिए लगातार प्रयास किए हैं. इसी का परिणाम है कि दोनों देशों के रिश्ते अब रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच चुके हैं.
टंडन ने कहा, “हिंद महासागर और प्रशांत महासागर क्षेत्र के देशों के रूप में हमारे बीच घनिष्ठ रणनीतिक संबंध होना आवश्यक है. यही इस साझेदारी की मूल सोच और आधार है.”
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल रणनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं. India एक बड़ा और तेजी से विकसित होता बाजार है, जहां अपार अवसर मौजूद हैं. वहीं, न्यूजीलैंड एक उन्नत अर्थव्यवस्था है, जिसके पास आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता है. उन्होंने कहा कि India ऐसी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के साथ साझेदारी को मजबूत करना चाहता है और दोनों देशों के पास मजबूत आर्थिक संबंध विकसित करने की बेहतरीन संभावनाएं हैं.
टंडन ने यह भी कहा कि समुद्री पड़ोसी होने के नाते India और न्यूजीलैंड के लिए विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करना बेहद जरूरी है.
वीजा नियमों और उनमें लचीलेपन को लेकर पूछे गए सवाल पर रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि वीजा नीति किसी भी देश का संप्रभु निर्णय होती है. उन्होंने कहा, “जब तक हमारे व्यवसाय सुचारु रूप से काम कर रहे हैं, हमारे छात्रों को पढ़ाई का अवसर मिल रहा है और दोनों देशों द्वारा तय किए गए आदान-प्रदान कार्यक्रम नियोजित रूप से जारी हैं, तब तक किसी तरह की चिंता की बात नहीं है.”
उन्होंने संकेत दिया कि India और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और दोनों देश रणनीतिक, आर्थिक, शैक्षणिक तथा जन-से-जन संपर्क के क्षेत्रों में संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
–
केआर/