सिंहावलोकन 2025: रक्षा क्षेत्र के लिए दमदार रहा यह साल, फ्रांस से राफेल खरीदा और तेजस के जरिए स्वेदशीकरण को बढ़ावा दिया

New Delhi, 18 दिसंबर . India के रक्षा क्षेत्र के लिए साल 2025 काफी महत्वपूर्ण रहा है. इस साल एक तरफ देश ने अमेरिका के साथ रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए 10 साल का डिफेंस फ्रेमवर्क साइन किया, साथ ही फ्रांस के साथ राफेल मरीन विमानों का सौदा किया. वहीं, रूस के साथ मिलकर रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को आगे बढ़ाया है.

India की ओर से इस साल अमेरिका के साथ 10 वर्ष का भारत-यूएस डिफेंस फ्रेमवर्क साइन किया है. इसके तहत दोनों देश रक्षा क्षेत्र में अपनी साझेदारी को गहरा करेंगे. इसका उद्देश्य रक्षा सहयोग को गहरा करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण और नीतिगत दिशा प्रदान करना है.

इसके साथ India ने अमेरिका से 31 एमक्यू-9बी ड्रोन को खरीदा है. इस डील की वैल्यू करीब 3.5 अरब डॉलर है.

India ने इस साल अप्रैल में फ्रांस के साथ भी एक बड़ी डिफेंस डील की है, जिसमें भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने को मंजूरी दी गई है, जिसमें 22 एक सीट वाले और चार दो सीट वाले लड़ाकू विमान शामिल है. इस डील की वैल्यू करीब 63,000 करोड़ रुपए है.

एक तरफ India आयात के माध्यम से सेना को बिना किसी देरी के आधुनिकीरण की ओर ले जा रहा है. वहीं, स्वदेशी रक्षा उपकरणों पर जोर देकर घरेलू रक्षा उत्पादन को भी बढ़ रहा है.

भारत-रूस के ज्वाइंट वेंचर इंडो-रसिया राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (आईआरआरपीएल), अमेठी ने एकके-203 असॉल्ट राइफल्स के दूसरी बैच की आपूर्ति 2025 की दूसरी छमाही में की है. यह भारत-रूस के बीच राइफल्स की आपूर्ति के लिए हुए 5,200 करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा है, जिसके तहत 6 लाख से ज्यादा राइफल्स की आपूर्ति की जाएगी.

इसके अलावा, Government ने 97 स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस की खरीद को भी मंजूरी दी है और इसकी वैल्यू 66,500 करोड़ रुपए है. यह फरवरी 2021 में दिए गए 83 तेजस लड़ाकू विमानों के ऑर्डर के अतिरिक्त है, जिसकी वैल्यू 46,898 करोड़ रुपए थी.

Union Minister मनसुख मांडविया का कहना है कि देश 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए के रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपए के रक्षा निर्यात की तरफ तेजी से बढ़ रहा है.

Union Minister ने Thursday को कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में देश का रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपए रहा था, जो कि वित्त वर्ष 2023-24 में 1.27 लाख करोड़ रुपए था. वहीं, पिछले एक दशक में इसमें 174 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है, जो कि वित्त वर्ष 2014-15 में 46,429 करोड़ रुपए पर था.

उन्होंने कहा, “India अब अपने रक्षा उपकरणों का लगभग 65 प्रतिशत घरेलू स्तर पर निर्मित करता है, जो पहले की 65-70 प्रतिशत की उच्च आयात निर्भरता से एक महत्वपूर्ण सुधार है.”

एबीएस/

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