
New Delhi, 7 अगस्त . केंद्र Government ने Friday को बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की समन्वित कार्रवाई के जरिए व्हाट्सऐप अकाउंट हैक करने वाले एक बड़े मैलवेयर अभियान से 10,000 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया है. गृह मंत्रालय (एमएचए) ने कहा कि सहयोग पोर्टल के माध्यम से कमांड एंड कंट्रोल (सी2) सर्वरों को जियो-ब्लॉक करने सहित कई कदम उठाए गए, जिससे इस साइबर हमले के प्रभाव को रोका जा सका.
गृह मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर हाल के दिनों में व्हाट्सऐप अकाउंट टेकओवर से जुड़ी शिकायतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है. ये हमले ऐसे मैलवेयर के जरिए किए जा रहे हैं, जिन्हें अकाउंट स्टेटमेंट या किसी Governmentी नियामक संस्था के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में छिपाकर भेजा जाता है.
मंत्रालय ने कहा, “इन समन्वित प्रयासों के माध्यम से अब तक 10,000 से अधिक भारतीयों को इस साइबर अभियान से सुरक्षित किया गया है. सहयोग पोर्टल के जरिए मैलवेयर से जुड़े सर्वरों को लगातार ब्लॉक किया जा रहा है.”
गृह मंत्रालय के मुताबिक, इस तरह की घटनाएं दिल्ली, Gujarat, Maharashtra और Rajasthan समेत कई राज्यों में सामने आई हैं. आई4सी ने इससे पहले 22 जून को भी एक एडवाइजरी जारी कर लोगों को ऐसे साइबर हमलों के प्रति सतर्क किया था, जिनमें Governmentी या नियामक अधिकारियों का रूप धारण कर व्हाट्सऐप अकाउंट पर कब्जा करने की कोशिश की जाती है.
मंत्रालय ने बताया कि साइबर अपराधी आमतौर पर व्हाट्सऐप, एसएमएस या ई-मेल के माध्यम से “स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट.जिप”, “आरबीआई.जिप” या “एमसीए.जिप” जैसे नामों वाली संपीड़ित (.जिप) फाइलें भेजते हैं. कई मामलों में फाइलों के नाम के आगे तारीख भी लिखी होती है, ताकि वे अधिक विश्वसनीय दिखाई दें.
ये संदेश इस तरह तैयार किए जाते हैं कि वे किसी बैंक खाते के विवरण, वित्तीय दस्तावेज या किसी नियामक संस्था की तत्काल सूचना जैसे प्रतीत हों. इससे लोग बिना सोचे-समझे फाइल खोल लेते हैं.
मंत्रालय ने बताया, “जब कोई व्यक्ति अपने विंडोज डेस्कटॉप या लैपटॉप पर इन जिप (जेडआईपी) फाइलों को एक्सट्रैक्ट कर खोलता है, तो उसके सिस्टम में एक ट्रोजन मैलवेयर इंस्टॉल हो जाता है जो डिवाइस को हैक कर लेता है और पीड़ित के सक्रिय व्हाट्सऐप वेब सेशन को हाईजैक कर लेता है.”
मंत्रालय ने यह भी बताया कि कई मामलों में साइबर अपराधी आयकर विभाग के नाम से फर्जी ई-मेल भी भेज रहे हैं, ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके.
एक बार व्हाट्सऐप अकाउंट हैक होने के बाद अपराधी उस अकाउंट का इस्तेमाल पीड़ित के सभी संपर्कों और ग्रुप्स में वही संक्रमित फाइल भेजने के लिए करते हैं. अक्सर संदेश में लिखा होता है कि फाइल को “कंपनी के फाइनेंस मैनेजर को वेरिफिकेशन के लिए भेजें” और कंप्यूटर पर खोलें.
Government के अनुसार, इस तरीके से संक्रमण की शृंखला तेजी से आगे बढ़ती है और कई बार कॉर्पोरेट नेटवर्क तक पहुंचकर बड़े पैमाने पर साइबर सुरक्षा खतरा पैदा कर सकती है.
गृह मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान या संदिग्ध जिप फाइल को डाउनलोड या ओपन न करें. यदि कोई संदेश बैंक, आरबीआई, एमसीए, आयकर विभाग या किसी अन्य Governmentी संस्था के नाम से प्राप्त होता है, तो उसकी सत्यता की जांच आधिकारिक माध्यमों से अवश्य करें. साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबर क्राइम डॉट गव डॉट इन (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें.
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डीबीपी