पाकिस्तान: अपहरण, धर्मांतरण और शादी का शिकार 13 वर्षीय मासूम को कोर्ट में पेश करने का आदेश

इस्लामाबाद, 16 जनवरी . Pakistan की एक संघीय अदालत ने Police को आदेश दिया है कि वह 13 वर्षीय ईसाई लड़की को खोजकर अदालत में पेश करे, जिसे कथित तौर पर अपहरण कर जबरन इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया और एक मुस्लिम व्यक्ति से उसकी जबरन शादी कर दी गई. स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी.

संघीय संवैधानिक न्यायालय (एफसीसी) की दो सदस्यीय पीठ न्यायमूर्ति अली बाकर नजफी और न्यायमूर्ति करीम खान आगा ने Police को मारिया शाहबाज और 30 वर्षीय शह्रयार अहमद को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया. Supreme Court के अधिवक्ता राना अब्दुल हमीद ने बताया कि अहमद ने 29 जुलाई को पिछले वर्ष मारिया शाहबाज का अपहरण किया, जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तित कराया और उससे शादी कर ली. यह जानकारी क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल की रिपोर्ट में दी गई.

न्यायालय ने मारिया के पिता शाहबाज मसीह द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया. अधिवक्ता हमीद ने कहा, “सेशंस कोर्ट, लाहौर और लाहौर हाईकोर्ट द्वारा बच्ची की बरामदगी से जुड़ी हमारी याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद हमने एफसीसी का रुख किया.”

उन्होंने आगे कहा, “हमने अदालत को बताया कि लड़की नाबालिग है और इस्लाम में धर्मांतरण और विवाह की आड़ में उसके साथ बलात्कार किया जा रहा है.”

हमीद के अनुसार, लाहौर Police ने आरोपी के साथ मिलीभगत की, जिसके चलते मजिस्ट्रेट अदालत ने लड़की के परिवार की शिकायत को खारिज कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि लड़की को यह बयान दर्ज कराने के लिए मजबूर किया गया कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम स्वीकार किया और अहमद से शादी की.

हमीद ने कहा, “उसने यह भी झूठा दावा किया कि वह बालिग है, जबकि आधिकारिक दस्तावेजी साक्ष्य यह साबित करते हैं कि वह नाबालिग है और प्रांतीय बाल विवाह कानूनों के तहत वैध विवाह आयु से कम है, जहां 16 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की शादी प्रतिबंधित है.”

मारिया के पिता, शाहबाज मसीह ने बताया कि उनका पड़ोसी अहमद उनकी बेटी को उस समय अगवा कर ले गया जब वह घर के पास की एक दुकान पर जा रही थी. उन्होंने नवाब टाउन Police स्टेशन, लाहौर में प्राथमिकी (First Information Report ) दर्ज कराई. हालांकि, Police ने उन्हें बताया कि मारिया ने 31 जुलाई 2025 को मॉडल टाउन के न्यायिक मजिस्ट्रेट हसन सरफराज चीमा के सामने बयान दिया था, जिसमें उसने स्वेच्छा से धर्मांतरण और विवाह का दावा किया.

क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि Pakistan में ऐसे मामलों का एक जाना-पहचाना पैटर्न है, जहां 10 वर्ष तक की उम्र की लड़कियों का अपहरण कर उन्हें जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तित किया जाता है और इस्लामी ‘विवाह’ की आड़ में उनके साथ बलात्कार किया जाता है. पीड़िताओं पर अपहरणकर्ताओं के पक्ष में झूठे बयान दर्ज कराने का दबाव डाला जाता है, जबकि न्यायाधीश अक्सर उम्र से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्यों को नजरअंदाज कर बच्चों को ‘कानूनी पत्नियों’ के रूप में उनके अपहरणकर्ताओं के हवाले कर देते हैं.”

इस बीच, रिपोर्टों में कहा गया है कि Pakistan में धार्मिक अल्पसंख्यकों को संस्थागत भेदभाव का सामना करना पड़ता है. उन्हें झूठे ईशनिंदा मामलों में फंसाने, भीड़ हिंसा, लक्षित हत्याओं, जमीन हड़पने, जबरन धर्मांतरण, मनमानी हिरासत और पूजा स्थलों सहित संपत्ति को नुकसान जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

डीएससी

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