विपक्षी संसदों ने एयर इंडिया हादसे और एफसीआरए मुद्दे पर सरकार से मांगा जवाब

New Delhi, 12 अगस्त . संसद के मानसून सत्र के दौरान Wednesday को विपक्षी दलों के सांसदों ने एयर इंडिया के पायलट के कथित डोप टेस्ट, Ahmedabad विमान हादसे की जांच रिपोर्ट, एफसीआरए विधेयक, बिहार की कानून-व्यवस्था, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर Government पर सवाल उठाए. कांग्रेस और Samajwadi Party के सांसदों ने अलग-अलग मामलों में Government से पारदर्शिता बरतने और संबंधित मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई करने की मांग की.

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने एयर इंडिया के पायलट के डोप टेस्ट से जुड़ी रिपोर्ट पर कहा कि उन्होंने रिपोर्ट न तो देखी है और न ही उसका अध्ययन किया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि सामने आई जानकारी सही है तो मामला बेहद गंभीर है और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को इसे पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ देखना चाहिए.

तिवारी ने Ahmedabad में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि हादसे की जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है और ऐसे संवेदनशील मामलों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है. उन्होंने सवाल उठाया कि विमान हादसे की रिपोर्ट सार्वजनिक करने को लेकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ.

वहीं, कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने एक संसदीय समिति और संयुक्त संसदीय समिति (सीजेपी) के जरिए Government के इरादों के विभिन्न पहलुओं की जांच किए जाने की वकालत की. उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक वर्ग को किसी न किसी रूप में परेशान करने का इरादा दिखाई देता है. भगत ने कहा कि जेपीसी में हर बिंदु की जांच होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद 19 में दिए गए अधिकारों का उल्लंघन न हो.

कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने एयर इंडिया घटना से अलग एक अन्य मुद्दे पर Government से गृह मंत्री के सदन में आकर जवाब देने की मांग की. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की शुरुआत से मांग रही है कि गृह मंत्री संसद में यह स्पष्ट करें कि बल प्रयोग और पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था. उन्होंने इस मामले में जवाबदेही तय किए जाने की जरूरत बताई.

एफसीआरए विधेयक को लेकर भी विपक्ष ने Government पर दबाव बनाया. कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि पहले जारी किया गया एफसीआरए का संस्करण काफी कठोर था और उन्हें लगता है कि उसमें कानून के गलत इस्तेमाल की आशंका थी. उन्होंने कहा कि सिविल सोसाइटी की ओर से इसका काफी विरोध हुआ है और संबंधित संस्थाओं ने Government से भी संपर्क किया है. Government के लिए उचित कदम यही होगा कि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाए, ताकि इसके प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा हो सके.

एसएके/पीएम

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