आतंकी सोच खत्म होने तक जारी रहेगा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ : राजनाथ सिंह

New Delhi, 15 जनवरी . ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, क्योंकि जब तक आतंकी सोच खत्म नहीं होती, तब तक शांति के लिए हमारा यह प्रयास लगातार जारी रहेगा. Thursday को jaipur में सेना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने यह बात कही.

उन्होंने कहा कि आतंकियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह सोच-समझकर और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई. इसी कारण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ India के इतिहास में सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई के रूप में नहीं, बल्कि साहस और संतुलन के प्रतीक के रूप में याद रखा जाएगा.

उन्होंने सेना के जवानों से कहा कि आप लोगों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जिस शौर्य का परिचय दिया, उसके लिए मैं आप सभी को बधाई देता हूं.

रक्षामंत्री ने कहा, ”15 जनवरी का यह दिन, भारतीय इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है. यह दिवस हमारे लिए केवल एक समारोह भर नहीं रहा. यह संकल्प का दिवस है, आत्ममंथन का अवसर है कि हमने अपने उन रक्षकों के लिए क्या किया, जिन्होंने हमारे लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया. वही भावना आज तक हमारी सेना में चली आ रही है. इसका एक नया और सशक्त उदाहरण, हमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में देखने को मिला. इस अभियान में India ने सिर्फ अपनी सैन्य ताकत ही नहीं दिखाई, बल्कि अपने राष्ट्रीय स्वभाव का भी परिचय दिया.”

रक्षामंत्री ने कहा कि वह इस अवसर पर, Rajasthan की इस धरा को भी नमन करते हैं. यह वह धरती है, जहां कण-कण में वीरता की गाथाएं समाई हुई हैं. शौर्य, पराक्रम और त्याग की अमर कहानियों से, यहां का इतिहास भरा पड़ा है. यह निस्वार्थ सेवा का वह उच्चतम आदर्श है, जिसकी परिकल्पना हमारे ऋषियों-मुनियों ने की थी. मुझे लगता है, देश के सभी नागरिकों को, विशेषकर हमारे युवाओं को, हमारे सैनिकों से राष्ट्र की, निस्वार्थ सेवा का यह गुण सीखना चाहिए. एक भारतीय सैनिक के लिए, उसका कर्तव्य एक ‘यज्ञ’ के समान होता है. वह युद्धभूमि उसकी ‘यज्ञशाला’ होती है और उसका त्याग उसकी ‘आहुति’ होती है. वह जानता है, कि इस यज्ञ का कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं मिलने वाला है. एक सैनिक जानता है, कि उसके सभी कर्मों का फल, व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि के रूप में प्राप्त होता है.

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अपने आप में, देश के लिए, हमारे नागरिकों के लिए, हमारे युवाओं के लिए, कई मायनों में अनुकरणीय है. कोई भी, जब भारतीय सेना को देखता है, तो यहां हमें पूरा India दिखता है. भारतीय सेना, अपने आप में, विविधता में एकता का सजीव उदाहरण है. सेना ने India की सामाजिक एकता को मजबूत करने में भी एक अतुल्य योगदान दिया है. यही कारण है कि भारतीय सेना केवल एक सैन्य बल नहीं है, यह राष्ट्र-निर्माण का एक प्रमुख स्तंभ है.

रक्षामंत्री ने कहा कि दुनिया के अधिकांश सैन्य बलों को देखिए, वहां सेना एक अलग डोमेन की तरह काम करती है. आमतौर पर नागरिकों के साथ उनका बहुत ज्यादा वास्ता नहीं होता. लेकिन India में, सेना नागरिकों के साथ मिलकर काम करती है. ऐसा सिर्फ बॉर्डर एरिया में ही नहीं है, बल्कि देश के हर क्षेत्र में देखने को मिलता है. जनता, सेना पर अटूट विश्वास करती है. यह विश्वास ही सेना की सबसे बड़ी ताकत है. सैनिक जानते हैं कि वे जिस जनता की रक्षा कर रहे हैं, वह उनके परिवार का हिस्सा है. जनता जानती है कि उनके सैनिक कभी भी उन्हें निराश नहीं करेंगे. यह पारस्परिक विश्वास का बंधन ही हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे की नींव है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमारी सेना दुनिया के लिए एक शांतिदूत के रूप में उभरी है. इससे India की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को भी बल मिला है.

उन्होंने कहा, ”नेशनल डिफेंस एकेडमी ने एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए, 2021 में हमारी बच्चियों के एडमिशन की शुरुआत की. यह हमारे लिए कोई आसान कदम नहीं था. कई प्रकार की परंपराओं और कल्चरल बाधाएं हमारे सामने थीं, यह बाधाएं आज भी हमारे समक्ष मौजूद हैं, परंतु हमारा प्रयास है कि हम लगातार इसी तरह महिलाओं को सशस्त्र बलों में ऐसे वातावरण प्रदान करें, जिसमें उनको समान अवसर मिलें. हमने सेनाओं में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने में भी, कई सकारात्मक प्रयास किए हैं. परंपरागत रूप से महिलाओं को, सेनाओं में सहायक शाखा के रूप में बहाल किया जाता रहा, लेकिन Prime Minister मोदी का यह विजन रहा है कि महिलाओं की भूमिका को बढ़ाया जाए. इसलिए धीरे-धीरे हमने इस दिशा में कई कदम उठाए. सेना में हमने शॉर्ट सर्विस कमीशन से कमीशनंड महिलाओं को, स्थायी कमीशन में कन्वर्ट करने का प्रावधान किया और जेंडर इक्वेलिटी के एक बड़े मुद्दे को दूर किया.”

जीसीबी/एसके

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