एक बार फिर अंकिता हत्याकांड के सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

देहरादून, 19 अगस्त . अंकिता भंडारी हत्याकांड में Wednesday को एक बार फिर सभी आरोपियों की जमानत याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी. प्रदेश Government की ओर से की गई मजबूत और प्रभावी पैरवी के चलते आरोपियों को कोई राहत नहीं मिल सकी. यह एक बार फिर स्पष्ट करता है कि Chief Minister पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश Government बेटी अंकिता को न्याय दिलाने और दोषियों को कानून के तहत कठोरतम सजा सुनिश्चित करने के लिए पूरी मजबूती से खड़ी है.

अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलना इस बात का प्रमाण है कि Chief Minister पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश Government ने इस संवेदनशील प्रकरण में पहले दिन से लेकर न्यायालय के अंतिम फैसले तक अपराधियों को कठोर सजा दिलाने के लिए पूरी गंभीरता और मजबूती से कार्य किया.

घटना सामने आने के बाद Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए. 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेजा गया और मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया. आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई.

जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान सहित महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया. न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा लगातार मजबूती से पैरवी की गई, जिसके चलते आरोपियों की जमानत अर्जियां बार-बार खारिज हुईं और वे मुकदमे के दौरान सलाखों के पीछे रहे. मजबूत जांच और प्रभावी अभियोजन के परिणामस्वरूप अंततः अंकिता के कातिलों को उम्रकैद की सजा मिली.

प्रदेश Government ने पूरी प्रक्रिया के दौरान अंकिता के माता-पिता और परिवार की भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. परिजनों की मांग के अनुरूप तीन बार Governmentी अधिवक्ता बदले गए. इतना ही नहीं, अंकिता के माता-पिता द्वारा सीबीआई जांच की मांग किए जाने पर Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश भी दिए.

Government ने परिवार को संबल प्रदान करने के लिए 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई. इसके साथ ही दिवंगत अंकिता के भाई और उनके पिता को नौकरी प्रदान कर परिवार के साथ खड़े होने की अपनी प्रतिबद्धता को भी पूरा किया.

इस पूरे प्रकरण में Chief Minister पुष्कर सिंह धामी का रुख पहले दिन से स्पष्ट रहा कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के कठघरे तक पहुंचाकर कठोरतम सजा दिलाई जाएगी. जांच को लेकर उठाए गए सवालों के बीच न्यायिक स्तर पर भी जांच प्रक्रिया को संतोषजनक माना गया और मजबूत अभियोजन के परिणामस्वरूप दोषियों को सजा तक पहुंचाया गया.

वहीं, तथाकथित ‘वीआईपी’ के नाम पर कांग्रेस और अन्य संगठन के लोगों द्वारा भी लगातार सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया. यदि इस संबंध में किसी के पास कोई ठोस तथ्य अथवा साक्ष्य था तो उसे जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष रखा जाना चाहिए था. अदालत के बाहर Political लाभ के लिए आरोप लगाना और जनता को भ्रमित करना न्याय की लड़ाई नहीं, बल्कि बेटी अंकिता से जुड़े अत्यंत संवेदनशील प्रकरण का Political इस्तेमाल है.

Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने पहले दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि बेटी अंकिता को न्याय दिलाना Government की सर्वोच्च प्राथमिकता है. त्वरित गिरफ्तारी, एसआईटी जांच, मजबूत चार्जशीट, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई, आरोपियों को जमानत न मिलने देना, परिवार की मांग के अनुसार अभियोजन व्यवस्था में बदलाव, आर्थिक सहायता और रोजगार से लेकर माता-पिता की मांग पर सीबीआई जांच के आदेश तक—Government ने हर स्तर पर संवेदनशीलता और दृढ़ता के साथ निर्णय लिए.

अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में धामी Government केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कार्रवाई, मजबूत पैरवी और निर्णायक परिणाम के साथ परिवार के साथ खड़ी रही.

डीकेपी/

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