
Lucknow, 30 मई . Chief Minister योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब हम सुरक्षा के मोर्चे पर मजबूत होंगे तो दुनिया भी मैत्री करेगी. कमजोर के आगे कोई नहीं झुकता. हम जब अधूरी बात कहते हैं तो वह अर्थ का अनर्थ करता है, इसलिए पूरी बात कहना सीखें. India की ऋषि परंपरा प्रेरणा देती है कि “अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तथैव च” यानी सामान्य जीवन में अहिंसा ही सर्वोच्च धर्म होना चाहिए, लेकिन सामने वाला देश व समाज की सुरक्षा के लिए खतरा है तो उसके लिए अंततः हिंसा ही अपनानी पड़ेगी. देश के दुश्मन के साथ यही हमारा धर्म है और भारतीय सेना पूरी मजबूती के साथ यह करती है.
Chief Minister Saturday को राजधानी में 19 करोड़ रुपये की लागत से 2 एकड़ से अधिक क्षेत्र में निर्मित नौसेना शौर्य वाटिका (नौसेना शौर्य संग्रहालय के द्वितीय चरण) के लोकार्पण अवसर पर उपस्थित सैन्य अधिकारियों, कार्मिकों व जन-समूह को संबोधित कर रहे थे. इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने Chief Minister के साथ इस वाटिका का उद्घाटन किया. इस अवसर पर नौसेना बैंड की अनुपम प्रस्तुति ने श्रोताओं का मन मोह लिया.
Chief Minister ने कहा कि जब सोच बड़ी होती है और व्यक्ति बड़े लक्ष्य के साथ आगे बढ़ता है तो सकारात्मक परिणाम आता है, जो युवाओं को नई प्रेरणा प्रदान करता है. इस वाटिका में आने वालों को भारतीय नौसेना के बारे में जानकारी मिलेगी. हमारे सैनिक किन सम-विषम परिस्थितियों में कार्य करते हैं, यह भी जानने का अवसर मिलेगा. यह जानकारी युवाओं के जीवन में चुनौतियों से जूझने की प्रेरणा होगी. नौसेना का लक्ष्य उसकी विराट सोच का प्रतीक है. सीएम ने आदर्श वाक्य “नभः स्पृशं दीप्तम्” का जिक्र किया और कहा कि आकाश की ऊंचाइयां छूने के लिए बड़ी सोच भी चाहिए. संकुचित सोच या भाव से बड़े लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता.
सीएम योगी ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi ने देशवासियों के सामने विकसित India की संकल्पना को रखा है. उन्होंने हर भारतवासी को पंचप्रण के साथ जुड़ने के लिए कहा है. हमारे मन में सेना व यूनिफॉर्मधारी फोर्स के प्रति सम्मान का भाव हो. जब भारतीय सैनिक माइनस डिग्री टेंपरेचर, रेगिस्तान की झुलसाने वाली गर्मी और समुद्र की लहरों का मुकाबला करते हुए सीमाओं की रक्षा करता है, तब 140 करोड़ भारतवासी चैन की नींद सोते हैं.
सीएम योगी ने कहा कि सुरक्षा के बेहतर माहौल में ही जन-कल्याण एवं विकास योजनाएं प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकती हैं. 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में रोज कर्फ्यू लगता था, पेशेवर माफिया व अपराधियों ने जीना हराम कर दिया था. असुरक्षित वातावरण में विकास व निवेश की संभावनाएं क्षीण हो गई थीं. लेकिन, जब हमारे सैनिक सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं तो नागरिकों का भी कर्तव्य है कि वे सैनिकों के प्रति सम्मान का भाव रखें.
Chief Minister ने कहा कि Lucknow में एक तरफ राष्ट्र प्रेरणास्थल है, जिसका उद्घाटन Prime Minister व रक्षा मंत्री ने 25 दिसंबर को किया था तो दूसरी तरफ नौसेना म्यूजियम के रूप में भारतीय सेना के शौर्य व पराक्रम का अद्भुत केंद्र यहां प्राप्त हुआ है. अभी इसका विस्तार भी होगा.
सीएम ने कहा कि रक्षा मंत्री जी कह रहे थे कि प्रदेश में भारतीय सेना से जुड़े अन्य कार्यों के लिए तत्काल प्रस्ताव दिए जाएं. मेरा मानना है कि महत्वपूर्ण चौराहों पर भारतीय सेना के वे टैंक रखे जाने चाहिए, जो अब वर्किंग कंडीशन में नहीं हैं. इन्हें जो भी देखेगा, उसके मन में भारतीय सेना में जाने और सेना के प्रति सम्मान का भाव पैदा होगा. उसे राष्ट्रभक्ति की नई प्रेरणा प्राप्त होगी, क्योंकि राष्ट्रभक्ति से बढ़कर कुछ भी नहीं हो सकता.
सीएम ने रक्षा मंत्री की प्रेरणा और उत्तर प्रदेश Government के साथ मिलकर सुव्यवस्थित ढंग से समय सीमा के अंदर कार्य पूरा कराने के लिए नौसेना अध्यक्ष व उनकी टीम के प्रति आभार जताया. Chief Minister ने कहा कि Lucknow आने वाला हर व्यक्ति India की परंपरा, विरासत, सुरक्षा से जुड़े इस नौसेना वाटिका केंद्र का भ्रमण कर गौरव की अनुभूति कर सकता है. यह केंद्र प्रदेश के युवाओं को नई सोच के साथ देखने, सुनने व जानने का अवसर प्रदान कर रहा है. आईएनएस गोमती ने लंबे समय तक भारतीय नौसेना के माध्यम से India की समुद्री सीमा की रक्षा की. 2022 में उसे नौसेना से निवृत्त किया गया और उसका बेहतरीन उपयोग करते हुए Lucknow की जीवनदायिनी गोमती नदी के तट पर स्थापित किया गया.
इस अवसर पर नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, उप Chief Minister केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा व ब्रजलाल, पर्यटन/संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक योगेश शुक्ल, राजेश्वर सिंह, ओपी श्रीवास्तव, अमरेश कुमार, जय देवी, विधान परिषद सदस्य अवनीश सिंह, मुकेश शर्मा, पवन सिंह चौहान, उमेश द्विवेदी, लालजी प्रसाद निर्मल, रामचंद्र प्रधान आदि मौजूद रहे.
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