नोएडा: एसएससी परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, मुख्य सरगना समेत 7 गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा, 22 मई . ग्रेटर नोएडा में कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) द्वारा आयोजित ऑनलाइन परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली करने वाले गिरोह का उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने भंडाफोड़ किया है.

एसटीएफ नोएडा यूनिट ने Friday को कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सरगना प्रदीप चौहान समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया. यह गिरोह सीएपीएफ और एसएसएफ में constable (जीडी) तथा असम राइफल्स में राइफलमैन भर्ती परीक्षा-2026 में प्रॉक्सी सर्वर और स्क्रीन शेयरिंग तकनीक के जरिए नकल कराने का काम कर रहा था. गिरफ्तारी ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क क्षेत्र स्थित बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र से की गई.

एसटीएफ के अनुसार आरोपियों के कब्जे से 50 लाख रुपये नकद, 10 मोबाइल फोन, 5 लैपटॉप, एक राउटर, अभ्यर्थियों की सूची, दो प्रवेश पत्र और इडुक्विटी कंपनी के चार पहचान पत्र बरामद किए गए हैं. गिरफ्तार आरोपियों में प्रदीप चौहान निवासी मुजफ्फरनगर, अरुण कुमार निवासी मथुरा, संदीप भाटी निवासी बुलंदशहर, निशांत राघव निवासी बुलंदशहर, अमित राणा निवासी बागपत, शाकिर मलिक निवासी बागपत तथा विवेक कुमार निवासी बुलंदशहर शामिल हैं. इनमें शाकिर और विवेक परीक्षा के अभ्यर्थी बताए गए हैं. एसटीएफ को लंबे समय से विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने वाले गिरोह की सक्रियता की सूचना मिल रही थी.

इसी क्रम में अपर Police अधीक्षक राजकुमार मिश्रा के निर्देशन और Police उपाधीक्षक नवेन्दु कुमार के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच की जा रही थी. जांच के दौरान सूचना मिली कि बालाजी डिजिटल जोन में आयोजित एसएससी ऑनलाइन परीक्षा में प्रॉक्सी सर्वर लगाकर बाहर बैठे सॉल्वर से पेपर हल कराया जा रहा है. सूचना के आधार पर एसटीएफ टीम ने परीक्षा केंद्र पर छापा मारा और सभी आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ में मुख्य आरोपी प्रदीप चौहान ने बताया कि उसने मेरठ कॉलेज से एमकॉम किया है और लंबे समय से ऑनलाइन परीक्षाओं में धांधली का काम कर रहा था. उसने बताया कि परीक्षा केंद्र पर इडुक्विटी कंपनी द्वारा परीक्षा आयोजित कराई जा रही थी और सर्वर को बायपास कर स्क्रीन शेयरिंग व्यूअर एप्लीकेशन के माध्यम से बाहर बैठे सॉल्वर से प्रश्नपत्र हल कराया जाता था. पूछताछ में सामने आया कि अमित राणा ने परीक्षा केंद्र के सर्वर को बायपास करने की तकनीक तैयार की थी, जबकि अरुण कुमार प्रॉक्सी सर्वर लगाने का काम करता था.

संदीप भाटी ऐसे अभ्यर्थियों को तलाश कर लाता था जो पैसे देकर परीक्षा पास करना चाहते थे. गिरोह प्रति अभ्यर्थी चार लाख रुपये वसूलता था. इसमें 50 हजार रुपये अभ्यर्थी लाने वाले व्यक्ति को दिए जाते थे, जबकि बाकी रकम गिरोह के सदस्यों और सॉल्वर के बीच बांटी जाती थी. इस मामले में थाना नॉलेज पार्क में बीएनएस की विभिन्न धाराओं, भर्ती परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अध्यादेश-2023 तथा आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. स्थानीय Police आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है.

पीकेटी/डीएससी

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