
Patna, 15 मई . Prime Minister Narendra Modi की पेट्रोल और डीजल के उपयोग को कम करने की अपील का असर अब बिहार के Political परिदृश्य में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. यहां कई नेता ‘फ्यूल सेविंग’ को बढ़ावा देने के लिए परिवहन के वैकल्पिक साधनों को अपना रहे हैं.
बिहार के Chief Minister सम्राट चौधरी ने पास के Patna स्थित Chief Minister आवास से सचिवालय तक पैदल चलकर ‘नो व्हीकल डे’ मनाया.
लगभग 150 मीटर की इस पैदल यात्रा में उनके साथ Chief Minister सचिवालय के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी थे.
गौरतलब है कि Chief Minister ने Patna और आसपास के क्षेत्रों में आधिकारिक यात्राओं के दौरान अपने काफिले का आकार पहले ही कम कर दिया है.
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश भी इस पहल में शामिल हुए और अपने आधिकारिक आवास से सचिवालय तक लगभग एक किलोमीटर पैदल चले.
उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे अमेरिका-ईरान संघर्ष से उपजे वैश्विक संकट के बीच ‘फ्यूल सेविंग’ को प्रोत्साहित करने के प्रतीक के रूप में कार्यालय तक पैदल जाएंगे.
इसी बीच, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का विकल्प चुना और इलेक्ट्रिक ई-रिक्शा से अपने कार्यालय पहुंचे.
तिवारी ने कहा कि हमने ईंधन बचाने का संदेश देने के लिए ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया है. यह अधिकारियों के लिए भी ईंधन बचाने का संदेश है. वैश्विक संकट को देखते हुए, ईंधन बचाना हमें सुरक्षित रहने में मदद करेगा. इस पहल में प्रशासनिक स्तर पर भी भागीदारी देखी गई.
कई जिलों के जिला मजिस्ट्रेट और Police अधीक्षक साइकिल से अपने कार्यालय पहुंचे.
खगड़िया के जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य न केवल ईंधन बचाना है, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देना भी है.
गया में सुरक्षाकर्मियों को भी साइकिलों पर आवागमन करते देखा गया, जिससे संरक्षण के व्यापक संदेश को बल मिला.
हालांकि, इन घटनाक्रमों पर Political प्रतिक्रियाएं भी आईं.
गया में मौजूद जेजेडी प्रमुख तेज प्रताप यादव ने ईंधन की बढ़ती कीमतों और बड़े Political काफिलों के निरंतर उपयोग को लेकर केंद्र और राज्य Governmentों दोनों की आलोचना की.
उन्होंने कहा कि यदि Prime Minister काफिलों को कम करने की वकालत कर रहे हैं, तो बिहार Government को इसे और अधिक सख्ती से लागू करना चाहिए.
ईंधन की कीमतें जनता के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय बनी हुई हैं, ऐसे में बिहार के ‘नो व्हीकल डे’ ने संरक्षण, शासन और बढ़ती लागतों पर चल रही बहस में एक प्रतीकात्मक लेकिन प्रत्यक्ष आयाम जोड़ दिया है.
–
एमएस/