
New Delhi, 17 अगस्त . उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वे चाहे जितने भी दावे कर लें, लेकिन हकीकत यह है कि सिर्फ अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में ही नहीं, बल्कि अगले 27 साल तक भी उत्तर प्रदेश की सत्ता में विपक्षी दलों के लिए कोई वैकेंसी नहीं है.
भाजपा नेता नकवी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के एक बयान पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं. अब चुनावी चौपालों पर चौतरफा चकल्लस करते हुए कुछ लोग दिखाई पड़ रहे हैं. ऐसे लोगों को भी अच्छी तरह मालूम है कि 2027 का चुनाव उनके लिए केकवॉक नहीं है. 2027 के चुनाव में भी ये चारों खाने चित होने वाले हैं. विपक्षी दल नए-नए प्रयोग और Political समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके सभी प्रयोग नाकाम होंगे.
नकवी ने कहा कि वे नए-नए शगूफे, नए-नए एक्सपेरिमेंट और नए-नए प्रयोग करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन ये सारे प्रयोग परास्त होंगे और पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगे. यूपी चुनाव 2027 तो दूर की बात है, अगले 27 साल तक कोई वैकेंसी नहीं है.
Jharkhand में छात्रों से जुड़े मुद्दे पर उन्होंने विपक्ष पर हमला बोला. नकवी ने कहा कि जो लोग जंतर-मंतर पर हंगामा करते हैं, वे Jharkhand में छात्रों के साथ हुई कथित क्रिमिनल नेग्लिजेंस पर चुप्पी साधे हुए हैं. उन्होंने राहुल गांधी पर भी इस मामले में लीपापोती करने का आरोप लगाया.
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के बयान पर नकवी ने कहा कि Prime Minister मोदी की धाक और धमक को कमजोर करने की कोशिश में देश की धाक और धमक को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाले कभी सफल नहीं होंगे. पीएम मोदी की धाक और धमक को धूमिल करने की धुन में, जो लोग मुल्क की धाक और धमक को धक्का देने की धूर्तता कर रहे हैं, वे सफल नहीं होंगे. आज वो कहेंगे कि हम ‘दिमागी नक्सल’ हैं, फिर कल कहेंगे कि हम ‘दिमागी जिन्ना’ हैं और उसके बाद कहेंगे कि हम दिमागी तौर पर एंटी नेशनल हैं. अगर इसी पर गर्व है तो खुद को ‘दिमागी एंटी नेशनल’ साबित करने से ज्यादा बड़ी बेवकूफी कुछ नहीं हो सकती.
वंदे मातरम् को लेकर हो रही राजनीति पर नकवी ने कहा कि यह गीत आजादी से पहले और आजादी के बाद भी लगातार Political विवादों का शिकार रहा है. India की आजादी की लड़ाई के दौरान लोग इस गीत को जुनून के साथ गाते थे और अंग्रेजों ने इस पर प्रतिबंध भी लगाया था. मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना ने इसे लेकर सांप्रदायिकता फैलने की बात कही थी.
नकवी ने आरोप लगाया कि बाद के वर्षों में Political कारणों से ‘वंदे मातरम्’ के साथ अलग-अलग तरह का व्यवहार किया गया और इसके कुछ हिस्सों को लेकर विवाद खड़ा किया गया. ‘वंदे मातरम्’ को नफरत भरी निगाहों से देखना उचित नहीं है.
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डीकेएम/एबीएम