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Sunday, 1 November 2026
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जम्मू-कश्मीर: आतंकवाद से जुड़े मामले में एनआईए ने अनंतनाग में दो ठिकानों पर मारा छापा

जम्मू-कश्मीर: आतंकवाद से जुड़े मामले में एनआईए ने अनंतनाग में दो ठिकानों पर मारा छापा

श्रीनगर, 22 अगस्त . राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने Saturday को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकवाद से जुड़े मामले में चल रही जांच के सिलसिले में दो जगहों पर छापेमारी की.

एनआईए ने अनंतनाग जिले के बिजबेहरा और डोरू में दो घरों पर छापा मारा. अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर Police और सीआरपीएफ के साथ मिलकर एनआईए ने Saturday को यह कार्रवाई की.

एजेंसी जिन मामलों की जांच कर रही है, उनमें टेरर फंडिंग और चैरिटी के गलत इस्तेमाल के मामले शामिल हैं. प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) जैसे नेटवर्क की जांच भी शामिल है, जो अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए चैरिटी की आड़ में देश और विदेश से फंड इकट्ठा करते और भेजते थे.

यह कार्रवाई आतंकी संगठनों द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और अल-बद्र जैसे संगठनों से जुड़े ओवरग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और हाइब्रिड ऑपरेटिव्स के खिलाफ भी की जा रही है.

एनआईए उन मामलों की भी जांच कर रही है, जिनमें ड्रोन या सीमा पार तस्करी नेटवर्क के जरिए पुंछ जैसे सीमावर्ती जिलों में स्टिकी बम, आईईडी, हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ पहुंचाए जाते हैं.

कट्टरपंथ और डिजिटल प्रोपेगैंडा की जांच में ऐसे मामले शामिल हैं, जिनमें हैंडलर्स social media प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाते हैं और नए बने टेरर संगठनों में भर्ती करते हैं. टेरर फंडिंग जांच का मुख्य मकसद उन आर्थिक रास्तों को बंद करना है, जिनसे पत्थरबाजी और अशांति को बढ़ावा मिल रहा था.

एनआईए ने हाफिज सईद और यासीन मलिक के अलावा हुर्रियत के प्रमुख नेताओं के खिलाफ विस्तृत चार्जशीट दायर की थीं. जांच में जटिल हवाला नेटवर्क, सीमा-पार व्यापार में हेरफेर और सड़कों पर हिंसा बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फंडिंग के रास्तों का पता चला था.

एनआईए की जांच ‘दुख्तरान-ए-मिल्लत’ पर केंद्रित थी, जो महिलाओं का एक अलगाववादी संगठन है. इस जांच का नतीजा एनआईए की विशेष अदालत के एक ऐतिहासिक फैसले के रूप में सामने आया. संगठन की संस्थापक आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई और India के खिलाफ शारीरिक व डिजिटल युद्ध छेड़ने के लिए उनके मुख्य सहयोगियों को 30 साल की जेल की सजा दी गई थी.

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डीसीएच/

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