
New Delhi, 4 अप्रैल . केंद्र Government ने Saturday को उन खबरों और social media दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण ईरान का कच्चा तेल India के वाडिनार से चीन भेज दिया गया. Government ने इन दावों को ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ और भ्रामक बताया है.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि हाल ही में आई रिपोर्ट्स, जिनमें कहा गया कि India को भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण ईरान से आने वाले तेल की एक खेप को नुकसान हुआ, पूरी तरह गलत हैं.
Government ने कहा कि India 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल आयात करता है और तेल कंपनियों को अपने व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार किसी भी सप्लायर से तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता होती है.
मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “ईरानी कच्चे तेल के एक कार्गो को India के वाडिनार बंदरगाह से ‘भुगतान संबंधी समस्याओं’ के कारण चीन की ओर मोड़े जाने की खबरें और social media पोस्ट तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत हैं.”
पोस्ट में आगे कहा गया है, “India 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, जिसमें कंपनियों को व्यावसायिक विचारों के आधार पर विभिन्न स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल प्राप्त करने की पूरी छूट है.”
यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्ट्स के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत प्रतिबंधित एक टैंकर, जिसका नाम ‘पिंग शुन’ है और जो ईरानी कच्चे तेल को ला रहा था, ने Gujarat के वाडिनार से अपना मार्ग बदलकर चीन के डोंगयिंग की ओर कर लिया.
शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, जहाज पहले India की ओर आ रहा था, लेकिन बाद में उसने अपनी मंजिल बदल ली, जिससे यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि भुगतान की समस्या के कारण ऐसा हुआ.
कुछ बाजार विश्लेषकों ने यह भी कहा था कि सख्त भुगतान शर्तें इस बदलाव की वजह हो सकती हैं.
हालांकि, Government ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान से तेल आयात में कोई भुगतान संबंधी बाधा नहीं है और इस तरह की खबरें भ्रामक हैं.
मंत्रालय ने यह भी भरोसा दिलाया कि मध्य पूर्व में चल रहे सप्लाई संकट के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों ने आने वाले महीनों के लिए कच्चे तेल की जरूरत पहले ही सुनिश्चित कर ली है, जिसमें ईरान से सप्लाई भी शामिल है.
मंत्रालय ने कहा, “तेल व्यापार के तरीके को समझे बिना जहाज के रूट बदलने को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. बिल ऑफ लैंडिंग में अक्सर संभावित गंतव्य लिखा होता है और समुद्र में जहाज अपनी मंजिल व्यापारिक जरूरतों और ऑपरेशनल कारणों से बदल सकते हैं.”
एलपीजी सप्लाई को लेकर आई अलग-अलग खबरों पर भी Government ने कहा कि वे रिपोर्टें गलत थीं.
Government ने पुष्टि की कि ‘सी बर्ड’ नाम का एलपीजी जहाज, जो करीब 44 हजार मीट्रिक टन ईरानी एलपीजी लेकर आया था, 2 अप्रैल को मैंगलोर पहुंच चुका है और फिलहाल अपना माल उतार रहा है.
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डीबीपी