
Patna, 11 जुलाई . जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने India की विदेश नीति, इंडो-पैसिफिक सहयोग, Prime Minister Narendra Modi की न्यूज़ीलैंड यात्रा और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक साझेदारी समेत विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है और India के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ मजबूत संबंध विकसित करना बेहद जरूरी है.
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया यात्रा से India को काफी लाभ मिला है और अब India तथा न्यूज़ीलैंड जैसे प्रमुख इंडो-पैसिफिक देश के बीच बातचीत और संभावित संयुक्त घोषणापत्र से कई सकारात्मक परिणाम सामने आने की उम्मीद है.
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच पारंपरिक रूप से अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन पिछले चार दशकों में किसी भारतीय Prime Minister की न्यूज़ीलैंड यात्रा नहीं हुई थी. इसे संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम बताया.
उन्होंने कहा कि Prime Minister Narendra Modi ने उन देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है, जिनके साथ India के ऐतिहासिक रिश्ते रहे हैं और जहां व्यापार, रणनीति तथा आर्थिक सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं. इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था में India की भूमिका को और मजबूत करना है.
असम के बजट को लेकर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा कि यह असम Government का अपना फैसला है. बिहार के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की एनडीए Government फिलहाल ऐसे किसी एजेंडे पर काम नहीं कर रही है और न ही इस तरह के किसी प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है.
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी द्वारा उम्मीदवार बदलने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि उम्मीदवार बदलने से उन्हें उम्मीद जरूर जगी होगी, लेकिन यह उनकी Political अपरिपक्वता को भी दर्शाता है.
उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर भाजपा और एनडीए का मजबूत गढ़ है और वहां Political पकड़ बनाना आसान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर के सामने अपनी Political विश्वसनीयता बनाए रखने और चुनाव में अपनी स्थिति साबित करने की चुनौती है.
आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ वैश्विक साझेदारी समय की जरूरत है. उनके अनुसार, कोई भी देश खुद को आतंकवाद के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं मान सकता. इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करके ही इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है.
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एसएके/एएस