
jaipur, 15 मई . Rajasthan कांग्रेस प्रमुख गोविंद सिंह डोटासरा ने Friday को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के पेपर लीक होने के बार-बार सामने आ रहे विवादों के बीच केंद्र Government लाखों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में नाकाम रही है.
यह सवाल उठाते हुए कि नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट जैसी अहम राष्ट्रीय परीक्षाओं की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को क्यों सौंपी जा रही है, डोटासरा ने दावा किया कि बार-बार पेपर लीक होने से परीक्षा प्रणाली की गंभीर कमियां उजागर हो गई हैं.
गोविंद सिंह डोटासरा ने Friday को नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट पेपर लीक के कथित मामलों को लेकर भाजपा Government पर भी हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक माफिया को खत्म करने के लिए पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बार-बार किए गए वादों के बावजूद, नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट-2026 का पेपर लीक Rajasthan में ही हुआ और इसमें कथित तौर पर भाजपा नेता शामिल थे.
jaipur स्थित कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है.
सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के बयानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के शिक्षा मंत्री ने टिप्पणी की थी, “तो क्या हुआ अगर पेपर लीक हो गया?”, जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौर ने कथित तौर पर यह कहकर विवाद को कम करने की कोशिश की कि यह लीक “केरल से शुरू हुआ था”.
डोटासरा ने दावा किया कि नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट-2026 पेपर लीक के सिलसिले में गिरफ्तार एक Political पार्टी के नेता द्वारा दी गई जानकारी से पता चला है कि नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट-2025 का पेपर भी Rajasthan में लीक हुआ था.
उन्होंने आरोप लगाया कि 2025 के पेपर लीक के बारे में जानकारी मिलने के बावजूद Rajasthan स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप First Information Report दर्ज करने में नाकाम रहा, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसे बचाया जा रहा था. उन्होंने कहा कि 3 मई को हुए नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट-2026 में 22 लाख से ज्यादा छात्र महीनों की कड़ी मेहनत और महंगी कोचिंग के बाद शामिल हुए थे, लेकिन पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई.
उन्होंने आरोप लगाया कि अनियमितताओं और पेपर लीक ने पहले हुई नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट परीक्षाओं को भी प्रभावित किया था, जिनमें 2024 और 2025 की परीक्षाएं भी शामिल हैं.
डोटासरा के अनुसार, 2026 के पेपर लीक की जांच से एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ जिसमें jaipur जिले के जमवारामगढ़ के दो लोग शामिल थे. इन पर आरोप है कि इन्होंने बार-बार नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट के प्रश्न पत्र हासिल किए और पैसों के बदले उन्हें अपने परिवार के सदस्यों और दूसरे उम्मीदवारों को बेचा.
उन्होंने दावा किया कि मांगीलाल और दिनेश बीवाल के परिवारों के पांच बच्चों ने नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट-2024 में बहुत कम स्कोर किया था, लेकिन बाद में नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट-2025 में उन्होंने बहुत अच्छे अंक हासिल किए और बिना किसी औपचारिक कोचिंग के Governmentी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पा लिया. उनके अनुसार, 2025 के पेपर लीक का मामला तभी सामने आया जब 2026 की जांच में उसी नेटवर्क की संलिप्तता का फिर से पता चला.
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के कामकाज पर सवाल उठाते हुए डोटासरा ने आरोप लगाया कि केंद्र Government छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में नाकाम रही है. उन्होंने यह भी पूछा कि नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाओं की ज़िम्मेदारी एक ऐसी संस्था को क्यों सौंपी जा रही है, जिसे उन्होंने ‘एनजीओ जैसी संस्था’ बताया.
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पीएसके