नीट पेपर लीक केस: छात्रों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट का किया स्वागत, बोले- सख्त कानून ही समाधान

कोटा, 23 जुलाई . Prime Minister Narendra Modi द्वारा पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के ऐलान का कोटा के नीट क्वालिफाइड छात्रों और उनके अभिभावकों ने स्वागत किया है. हालांकि, छात्रों का कहना है कि केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली को इतना मजबूत बनाया जाना चाहिए कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं दोबारा न हों.

नीट में ऑल इंडिया रैंक 16 हासिल करने वाले छात्र कार्तिक चौधरी ने कहा कि पेपर लीक का सबसे अधिक असर मेधावी छात्रों पर पड़ता है. री-नीट की घोषणा के बाद उन्होंने पूरे एक महीने तक पहले से भी अधिक मेहनत की. विरोध प्रदर्शन अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन उन्होंने उस समय दिल्ली जाकर प्रदर्शन करने के बजाय पढ़ाई को प्राथमिकता दी. अगर वह उस एक महीने में आंदोलन में शामिल हो जाते तो शायद आज यह सफलता हासिल नहीं कर पाते.

Prime Minister Narendra Modi की घोषणा पर कार्तिक चौधरी ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला बेहद महत्वपूर्ण है. यह कदम पहले भी उठाया जा सकता था, लेकिन अब जब इसकी घोषणा हो गई है तो दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिलनी चाहिए. यह फैसला छात्रों के हित में है और भविष्य में भी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाले ऐसे निर्णय लगातार लिए जाने चाहिए. दो साल की कठिन तैयारी के बाद यदि परीक्षा का पेपर लीक हो जाए तो छात्रों का आत्मविश्वास बुरी तरह प्रभावित होता है. इससे परीक्षा प्रणाली पर उनका विश्वास भी कमजोर पड़ जाता है. अब यह मुद्दा काफी हद तक Political बन चुका है, जबकि इसे शिक्षा सुधार तक सीमित रहना चाहिए. Government को नए नियम जल्द लागू कर शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने चाहिए.

छात्र के अभिभावक सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि पेपर लीक की घटनाएं पूरी तरह रुक जाएं. पेपर लीक होने से केवल छात्र ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता भी गहरी निराशा में चले जाते हैं, क्योंकि वर्षों की मेहनत एक झटके में प्रभावित हो जाती है. Prime Minister मोदी के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि दोषियों को कठोर सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई ऐसी गलती करने की हिम्मत न करे. फास्ट ट्रैक कोर्ट से लोगों का विश्वास बढ़ेगा और ऐसे मामलों में जल्दी न्याय मिलेगा. वहीं, जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन होना चाहिए, लेकिन आंदोलन हिंसक या उग्र नहीं होना चाहिए.

नीट में पहले पेपर में 696 और री-नीट में 667 अंक हासिल करने वाले छात्र हार्दिक मिकजानी ने कहा कि नीट री-एग्जाम का पूरा दौर मानसिक तनाव से भरा हुआ था. वह एक महीना उनके जीवन का सबसे कठिन समय था. दोबारा उसी स्तर की तैयारी करना बेहद मुश्किल था, क्योंकि परीक्षा से पहले वह कई बार पूरे सिलेबस का रिवीजन कर चुके थे. कोटा लौटकर फिर से उसी माहौल में ढलना और केवल दो सप्ताह के भीतर पूरे सिलेबस को पहले जैसी गहराई से तैयार करना बेहद चुनौतीपूर्ण था.

Prime Minister मोदी के बयान पर हार्दिक ने कहा कि केवल दोषियों को सजा देना पर्याप्त समाधान नहीं है. असली चुनौती पेपर लीक होने से पहले ऐसी घटनाओं को रोकना है. अगर हर बार पेपर लीक के बाद केवल री-नीट कराया जाएगा तो छात्रों को बार-बार मानसिक तनाव झेलना पड़ेगा और इसका गंभीर असर उनकी मानसिक स्थिति पर पड़ेगा. Government ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात कही थी, इसलिए उसे परीक्षा प्रणाली में भी पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए. पेपर लीक भ्रष्टाचार का ही परिणाम है और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ भी कड़े कानून और सख्त कार्रवाई जरूरी है. Government के निर्देशों पर उन्होंने कहा कि केवल घोषणा करना आसान होता है, असली चुनौती समय पर प्रभावी कार्रवाई करना है.

जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर हार्दिक ने कहा कि वह आंदोलन का समर्थन करते हैं. उनका भी वहां जाने का मन था, लेकिन कुछ कारणों से नहीं जा सके. मुख्यधारा के मीडिया में जिस तरह इस आंदोलन को हिंसक या विशेष Political विचारधारा से जोड़कर दिखाया जा रहा है, उससे वह सहमत नहीं हैं.

एक छात्रा ने बताया कि पूरे वर्ष की मेहनत और लगातार मॉक टेस्ट के बाद वह परीक्षा देने गई थीं और अपने प्रदर्शन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थीं, लेकिन पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा उसी मानसिक स्थिति में लौटना बेहद कठिन रहा. री-नीट की तैयारी के लिए मिले 40-45 दिनों में से लगभग 10-15 दिन केवल मानसिक रूप से दोबारा तैयारी के माहौल में आने में निकल गए. लगातार यह चिंता बनी रही कि री-एग्जाम पहले से बेहतर होगा या नहीं. उन्होंने बताया कि पहले नीट में उनके 665 अंक आए थे, जबकि री-नीट में 601 अंक, यानी 64 अंकों की गिरावट हुई.

छात्रा ने कहा कि Government की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि आखिर पेपर लीक क्यों हो रहे हैं, इसके पीछे कौन लोग हैं और उन्हें सबसे कड़ी सजा कैसे दी जाए. राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए, क्योंकि यह देश के युवाओं और उनके भविष्य का सवाल है. यदि निष्पक्ष व्यवस्था नहीं बनेगी तो प्रतिभाशाली छात्र विदेशों का रुख करने लगेंगे.

Prime Minister मोदी की घोषणा पर छात्रा ने कहा कि यदि निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई होती है तो यह स्वागत योग्य कदम है. Government की जिम्मेदारी है कि छात्रों को कम से कम शिक्षा के क्षेत्र में पूरी तरह निष्पक्ष व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए. फास्ट ट्रैक कोर्ट को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई तेज गति से होनी चाहिए. देश के सर्वश्रेष्ठ न्यायविदों और वकीलों को ऐसे मामलों में लगाया जाना चाहिए, क्योंकि यह देश के युवाओं का भविष्य तय करने वाला विषय है. उन्होंने कहा कि कोई भी छात्र वर्षों तक न्याय का इंतजार नहीं कर सकता.

छात्रा ने आगे कहा कि अगले वर्ष से नीट को (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) मोड में कराना सकारात्मक कदम है, क्योंकि इससे परीक्षा की दक्षता बढ़ेगी और पेपर लीक की आशंका भी कम होगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी परीक्षा की सफलता अंततः उसकी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है. जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए छात्रा ने कहा कि युवाओं की आवाज सुनी जानी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में ऐसे सुधार किए जाने चाहिए, जिससे भविष्य में किसी भी छात्र को पेपर लीक जैसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े.

पीएसके/डीकेपी

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