
New Delhi, 5 अगस्त . संसद के मानसून सत्र के दौरान भाजपा के सांसदों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विपक्ष के रवैये, मदरसों, राहुल गांधी और प्रस्तावित यूपीआई भुगतान व्यवस्था से जुड़े विधेयक पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दीं.
BJP MP बांसुरी स्वराज ने Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास न तो विकास का कोई स्पष्ट विजन है और न ही कोई सकारात्मक एजेंडा.
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की राजनीति केवल आरोप लगाने और भ्रम फैलाने तक सीमित है. तथ्यों के अभाव में राहुल गांधी बार-बार राष्ट्रीय संस्थानों और वैचारिक संगठनों विशेषकर आरएसएस पर बेबुनियाद आरोप लगाते हैं. आरएसएस पिछले 100 वर्षों से राष्ट्र-निर्माण और आपदा राहत कार्यों में निस्वार्थ भाव से योगदान देता आया है. उन्होंने Jharkhand में कथित पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी से सवाल किया कि छात्रों के हितों की बात करने वाले विपक्ष के नेता उस मामले पर क्यों नहीं बोले.
BJP MP दिनेश शर्मा ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक सामाजिक संगठन है, जिसने आपदा के समय और सामाजिक सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि आरएसएस की भूमिका को समझते हुए देश के पहले Prime Minister जवाहरलाल नेहरू ने भी इसे गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का अवसर दिया था. संघ ने लगातार राष्ट्रहित में कार्य किया है और समाज सेवा को अपनी प्राथमिकता बनाया है.
BJP MP शशांक मणि त्रिपाठी ने संसद में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लेकर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक सदन की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है. सांसद अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं को उठाने के लिए संसद आते हैं और सदन की कार्यवाही को बाधित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है.
BJP MP अरुण गोविल ने भी विपक्ष के रवैये की आलोचना की. उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल प्लेकार्ड लेकर सदन में आता है और शोर-शराबा करता है जबकि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचता है. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि संसद संवाद और बहस का मंच है, न कि केवल विरोध प्रदर्शन का.
BJP MP साक्षी महाराज ने मदरसों को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के उपChief Minister केशव प्रसाद मौर्य ने जो कहा है, वही वह पहले भी कह चुके हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसे आतंकवाद पैदा करने की फैक्ट्री बन गए हैं और शिक्षा के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है. उनके इस बयान पर Political प्रतिक्रिया की संभावना जताई जा रही है.
इस बीच, यूपीआई भुगतान प्रणाली से जुड़े केंद्र Government के प्रस्तावित विधेयक पर BJP MP और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पहले विधेयक का पूरा विवरण सामने आने देना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि Government कोई कानून ला रही है तो उसके पीछे निश्चित रूप से ठोस कारण होंगे. उन्होंने India में डिजिटल भुगतान की तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता और यूपीआई लेनदेन को वैश्विक स्तर पर रिकॉर्ड बताया.
प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर पहले से ही शुल्क में छूट दी गई है ताकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े. उनका कहना था कि यदि भविष्य में कुछ अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं और उन पर मामूली शुल्क लिया जाता है, तो उसे बैंकिंग सेवाओं की तरह स्वीकार किया जा सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी व्यवस्था में व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ प्रभावित नहीं होना चाहिए.
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एसएके/पीएम