नौसेना को मिलेंगी युद्धपोत और पनडुब्बियों की ईंधन आपूर्ति करने वाली विशेष नौकाएं

New Delhi, 3 मार्च . भारतीय नौसेना को 04 विशेष नौकाएं मिलेंगी. इन नौकाओं का निर्माण स्वदेश में ही किया जाएगा. 500 टन की क्षमता से लैस स्वचालित ईंधन आपूर्ति वाली ये नौकाएं बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों की सहयोगी के रूप में काम करेंगी. ये नौसैनिक नौकाएं आवश्यकता पड़ने पर युद्धपोतों और पनडुब्बियों तक सीधे ईंधन की आपूर्ति कर सकती हैं.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन नौकाओं के निर्माण कार्य के लिए Maharashtra के ठाणे स्थित सॉफ्ट शिपयार्ड लिमिटेड के साथ एक अनुबंध किया गया है. सॉफ्ट शिपयार्ड लिमिटेड एक निजी जहाज निर्माण कंपनी है. यहां बनाई जाने वाली आधुनिक नौकाएं बंदरगाह या लंगर डाले खड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों तक सीधे ईंधन पहुंचाएंगी. इससे बड़े जहाजों को अलग से ईंधन भरवाने की झंझट नहीं रहेगी और उनका समय भी बचेगा. इस पहल से नौसेना की तैयारी और तत्परता में भी सुधार होगा.

रक्षा मंत्रालय के अनुसार इन नौकाओं का निर्माण पूरी तरह देश में ही किया जाएगा. यह कदम Government के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत करने वाला माना जा रहा है. इससे देश में ही जहाज निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और छोटे-मध्यम उद्योगों को काम मिलेगा. निर्माण के दौरान सुरक्षा और गुणवत्ता के सभी तय नियमों का पालन किया जाएगा, ताकि नौसेना को भरोसेमंद और सुरक्षित नौकाएं मिल सकें. यह समझौता नौसेना की ताकत बढ़ाने के साथ-साथ देश के समुद्री उद्योग को भी आगे ले जाने वाला कदम है.

गौरतलब है कि हाल ही में नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने बताया था कि इस वर्ष 2026 में लगभग 15 पोत नौसेना में शामिल करने की योजना है. यह अब तक की सर्वाधिक सम्मिलन दर होगी. वहीं वर्ष 2035 तक भारतीय नौसेना का लक्ष्य 200 से अधिक पोतों वाली नौसेना बनने का है. इसके लिए वर्तमान में 50 पोत भारतीय शिपयार्डों में निर्मित हो रहे हैं. नौसेना का लक्ष्य 2047 तक पूर्णत: आत्मनिर्भर नौसैनिक शक्ति का निर्माण करना है.

हाल ही में भारतीय नौसेना में एक नया युद्धपोत ‘अंजदीप’ शामिल किया गया था. यह स्वदेशी रूप से निर्मित पनडुब्बी रोधी उथले जल का युद्धपोत है. यह युद्धपोत दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें नाकाम करने में सक्षम है. दरअसल युद्धपोत अंजदीप ‘डॉल्फिन हंटर’ के रूप में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है. यह पोत स्वदेशी, अत्याधुनिक पनडुब्बी रोधी हथियारों और सेंसर पैकेज से सुसज्जित है. इसमें हल माउंटेड सोनार ‘अभय’ भी शामिल है. यही नहीं, यह भारतीय युद्धपोत हल्के टॉरपीडो और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से भी लैस है.

जीसीबी/एसके

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