मराठा इतिहास को छोटा करने की राष्ट्रीय साजिश: शिवसेना (यूबीटी)

Mumbai , 1 मई . शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने Friday को Maharashtra के 67वें स्थापना दिवस पर दावा किया कि मराठी लोगों को Maharashtra-विरोधियों द्वारा हाशिए पर धकेला जा रहा है. इस कथित राष्ट्रीय साजिश के खिलाफ अपनी पहचान और गौरव की रक्षा के लिए इसने मराठियों से एक बार फिर ‘Maharashtra धर्म’ का नारा बुलंद करने का आह्वान किया.

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में ठाकरे गुट ने कहा कि आज भी Mumbai में रिक्शा चालक मराठी बोलने से इनकार कर देते हैं. भाषा को लागू करने के बजाय, शासक उनके सामने झुक रहे हैं और उन फैसलों को रोक रहे हैं जो मराठी को अनिवार्य बना सकते हैं.

प्रगतिशील Maharashtra इस समय अंधविश्वास और पाखंड के चंगुल में फंसा हुआ है. Maharashtra का स्वाभिमान और मराठी पहचान (अस्मिता) केंद्र में बैठे Maharashtra-विरोधियों और राज्य के भीतर बैठे आज्ञाकारी शासकों के गठजोड़ से दम तोड़ रही है.

सामना के संपादकीय में कहा गया कि Maharashtra और मराठी गौरव की मशाल को बुझाने की एक राष्ट्रीय साजिश चल रही है. मराठी लोगों को इसे विफल करना होगा, इसके लिए, ‘Maharashtra धर्म’ का बिगुल एक बार फिर बजाना होगा.

संपादकीय में आगे कहा गया कि जहां Government मराठी लोगों के कल्याण के संबंध में वादे करती है, वहीं उसके बयानों और वास्तविकता के बीच एक गहरा विरोधाभास है. Mumbai मिल मजदूरों, किसानों और श्रमिकों के खून-पसीने से बसाई गई थी. फिर भी आज भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या Mumbai अब वास्तव में उन श्रमिकों की है. राजधानी के ठीक दिल में, कथित तौर पर रिक्शा चालक मराठी बोलने से इनकार कर देते हैं. भाषा को लागू करने के बजाय, वर्तमान प्रशासन पर इन तत्वों के सामने ‘साष्टांग प्रणाम’ करने का आरोप है, क्योंकि वे उन फैसलों को रोक रहे हैं जो मराठी को अनिवार्य बना सकते हैं.

संपादकीय में आगे दावा किया गया कि एनसीईआरटी और सीबीएसई पाठ्यक्रम में हालिया बदलाव, जैसे कि मराठा साम्राज्य के नक्शे हटाना या शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को महज 68 शब्दों तक सीमित कर देना, राज्य की विरासत और मराठी पहचान को व्यवस्थित रूप से मिटाने की ओर इशारा करते हैं.

1 मई न केवल Maharashtra दिवस है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस भी है. Maharashtra के निर्माण का ‘पवित्र कलश’ इसी दिन सामने आया था, क्योंकि मिल मजदूरों, किसानों और श्रमिकों ने यह सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष किया था कि Mumbai राज्य का ही हिस्सा बना रहे. क्या Mumbai सचमुच अब भी उन श्रमिकों का है.

संपादकीय में कहा गया कि जहां एक ओर Maharashtra हमेशा से ही प्रगति के पथ पर अग्रसर रहा है, वहीं अब वह अंधविश्वास और ढोंगी बाबाओं की अजगर जैसी जकड़ में फंस गया है. इसमें आरोप लगाया गया कि राज्य को लूटने के लिए लोगों को इन भ्रांतियों में उलझाए रखने की एक साफ तौर पर दिखाई देने वाली सुनियोजित साजिश चल रही है, फिर भी मराठी लोग अभी तक इसके विरोध में खड़े नहीं हुए हैं.

डीकेएम/पीएम

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