
New Delhi, 16 अप्रैल . देशभर में महिलाओं को Political आरक्षण देने को लेकर उत्साह और समर्थन की लहर दौड़ रही है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) के कार्यान्वयन को तेज करने के लिए संसद के विशेष सत्र में Thursday से चर्चा शुरू हो गई है. विभिन्न Political दलों, महिला संगठनों और प्रमुख हस्तियों ने इस विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि यह महिलाओं को उनका लंबे समय से लंबित हक दिलाएगा.
शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना सिर्फ Government की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की जिम्मेदारी है. संसद का यह फर्ज है कि वह यह सुनिश्चित करे कि इस देश की महिलाएं सशक्त हों और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर मिलें. जब 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ सर्वसम्मति से पारित हुआ तो यह पूरे देश की महिलाओं के प्रति एक सामूहिक प्रतिबद्धता थी. उस समय मैं संसद में मौजूद थी, और हमने वादा किया था कि 2029 तक हम महिलाओं के लिए जगह और अवसर पैदा करेंगे. आदर्श रूप से, यह काम 1947 में ही हो जाना चाहिए था, लेकिन अगर अब भी यह हो रहा है तो सभी को इसके समर्थन में आगे आना चाहिए.
दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर भाजपा महिला विंग द्वारा महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में आयोजित रैली में भाजपा महिला मोर्चा की सदस्य सुमैरा मीर ने कहा कि पहले सत्ता में रहीं सभी Political पार्टियों के पास कई अवसर थे, लेकिन वे महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कभी कोई विजन नहीं लाईं. हालांकि, Prime Minister मोदी हमेशा एक स्पष्ट विजन के साथ काम करते हैं, जिसे उन्होंने आज साबित कर दिया है. हमारी बहनें इस आरक्षण से बहुत खुश हैं और Prime Minister मोदी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हैं.
लोक गायिका उर्मिला श्रीवास्तव ने Prime Minister के संबोधन का जिक्र करते हुए कहा कि आज हमने Prime Minister Narendra Modi को महिलाओं के प्रति अत्यंत सम्मान के साथ बोलते हुए सुना. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि महिलाओं को अधिकार देना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका वैध हक है.
लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि मेरा मानना है कि India के लिए यह वास्तव में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी दिन है. Prime Minister मोदी ने महिलाओं के प्रति गहरे सम्मान के साथ बात की और जोर दिया कि महिलाओं को अधिकार देना कोई दान-पुण्य नहीं, बल्कि उनका वैधानिक हक है. यदि उनके अधिकार सुनिश्चित नहीं किए गए तो यह ‘मातृ शक्ति’ हमें कभी माफ नहीं करेगी.
पद्म श्री से सम्मानित सोमा घोष ने कहा कि पिछले 30 सालों से इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. 2010 में यह बिल पास होने ही वाला था, लेकिन अटक गया. आज Prime Minister Narendra Modi हाथ जोड़कर विनम्र अपील कर रहे हैं—कृपया इसे Political मुद्दा न मानें. यह महिलाओं के अधिकारों का मामला है.
भाजपा नेता नेहा शालिनी दुआ ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बिल 40 साल पहले ही पास हो जाना चाहिए था. अब जब यह पास होने वाला है तो कई विपक्षी पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं, ताकि Prime Minister को श्रेय न मिले.
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर राहटकर ने कहा कि आज का दिन बहुत ही ऐतिहासिक है. हमारे देश की महिलाएं हमेशा से ही नेतृत्व करती आई हैं.
Haryana राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने कहा कि इतिहास में यह याद रखा जाएगा कि ठीक इसी दिन Prime Minister मोदी ने इसे आधिकारिक मंजूरी दी और बेटियों के लिए रेड कार्पेट की तरह रास्ता खुल गया.
उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान ने मुस्लिम महिलाओं के अलग आरक्षण की मांग को खारिज करते हुए कहा कि यह मुस्लिम महिलाओं को ही क्यों दिया जाना चाहिए. महिलाओं का कोई धर्म नहीं होता, कोई जाति नहीं होती. आधी आबादी की ओर से मैं Prime Minister का गहरा आभार व्यक्त करती हूं.
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कहा कि मैं Prime Minister Narendra Modi का बार-बार धन्यवाद करना चाहती हूं, जिन्होंने अपने दृढ़ प्रयासों से नारी शक्ति अधिनियम को चर्चा का विषय बनाया और इसे पारित करवाने के लिए भरसक प्रयास किए. हर महिला, चाहे भाजपा की विचारधारा से जुड़ी हो या नहीं, उनका आभार व्यक्त करती है. यह विधेयक महिलाओं को Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं का यह सामूहिक स्वर साफ दर्शाता है कि अब समय आ गया है कि राजनीति के दरवाजे महिलाओं के लिए पूरी तरह खोल दिए जाएं. यह न केवल लोकतंत्र को मजबूत करेगा, बल्कि देश के समग्र विकास में ‘नारी शक्ति’ की भागीदारी को नई ऊंचाई प्रदान करेगा.
आरती बसारिया ने कहा कि यह बहुत जरूरी है. हमें यह बहुत पहले मिल जाना चाहिए था. हमारे समाज में 50 प्रतिशत महिलाएं हैं, लेकिन हम सिर्फ 33 प्रतिशत तक ही पहुंच पा रही हैं.
शिल्पी अरोड़ा ने कहा कि हम आधी आबादी हैं. जब तक हमारी आवाज सबसे ऊंचे स्तर तक नहीं पहुंचेगी, चाहे विधानसभा हो, Lok Sabha हो या राज्यसभा महिलाओं के खिलाफ अपराध कम नहीं होंगे.
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डीकेएम/डीकेपी