
New Delhi, 17 मार्च . चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अब नजदीक आ गया है. माता रानी के पावन पर्व से पहले कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर सुरेंद्रनाथ अवधूत ने के साथ खास बातचीत में बताया कि नवरात्रि के दौरान खास ग्रह-नक्षत्रों के कारण की गई पूजा का फल बहुत अधिक मिलता है.
उन्होंने कहा, “नवरात्र का पावन अवसर शक्ति की उपासना का एक विशेष पर्व है. ब्रह्मांड में बनने वाले विशेष योगों के कारण इस समय की गई उपासना अत्यंत फलदायी होती है. आयुर्वेद में इस समय को ‘यमदंष्ट्र काल’ कहा गया है. यह एक ऐसा समय होता है, जब रोगों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में सात्विक व्रत और नियमित हल्का भोजन करने से शरीर में नई ऊर्जा आती है. यही कारण है कि इसे शक्ति की उपासना का प्रमुख पर्व माना गया है. इस बार, वासंतिक नवरात्रि का शुभ आरंभ 19 मार्च से हो रहा है और यह 27 मार्च तक जारी रहेगा.”
उन्होंने आगे इसका विशेष मुहूर्त बताया. उन्होंने कहा, “इस बार प्रतिपदा तिथि होने के कारण घटस्थापना (कलश स्थापना) 19 मार्च दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक का अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ रहेगा. जिस स्थान पर पूजा करनी है उसे स्वच्छ करें और वहां एक चौकोर वेदी का निर्माण करें और मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें. रोज सुबह 5:45 से 6:45 बजे तक नित्य पूजा करें. सक्षम लोग विद्वानों से नवचंडी या सतचंडी पाठ करवा सकते हैं.
पीठाधीश्वर सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि इस बार मां भगवती पालकी पर सवार होकर आ रही हैं. शास्त्रों में ऐसा आगमन शुभ नहीं माना जाता. इससे प्राकृतिक आपदाओं या उथल-पुथल की आशंका जताई जा रही है. इसलिए भक्तों को सतर्क रहने की सलाह है.
पीठाधीश्वर ने कहा, “व्रत के समय हल्का-फुल्का सात्विक भोजन कर सकते हैं. तला-भुना खाना सेहत के लिए ठीक नहीं है. नौ दिन पूर्ण व्रत रखना सबसे अच्छा है, लेकिन अगर संभव न हो तो कम से कम सप्तमी, अष्टमी और नवमी को विशेष पूजन करें. इससे मां का आशीर्वाद मिलता है.”
उन्होंने आखिरी में कालकाजी मंदिर में व्यवस्थाओं को लेकर बात की. उन्होंने बताया, “नवरात्रि के समय मां कालकाजी मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है, हालांकि भक्तों को आराम से दर्शन के लिए बैरिकेडर लगवा देते हैं, लेकिन इस बार तीन अतिरिक्त लाइनें रहेंगी. वहीं, नवरात्रि के दौरान भीड़ पर काबू पाने के लिए हमेशा की तरह Police तैनात रहेगी. भक्त सुरक्षित दर्शन कर सकें. मंदिर प्रशासन ने भक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं.
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एनएस/वीसी