
New Delhi, 1 मई . मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार अलफलाह यूनिवर्सिटी के निदेशक जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका को साकेत कोर्ट ने खारिज कर दिया है.
इससे पहले 4 अप्रैल को भी साकेत कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था.
जानकारी के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की Police हिरासत खत्म होने के बाद उन्हें कोर्ट में एएसजे शीतल चौधरी प्रधान के सामने पेश किया गया था. जांच एजेंसी की तरफ से कहा गया कि अभी जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ जांच चल रही है और सबूत एकत्रित करने के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा जाए. जिसके बाद कोर्ट ने हिरासत में भेज दिया था.
जवाद को Enforcement Directorate ने 24 मार्च को तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया था. यह उनके खिलाफ दर्ज दूसरा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है.
बता दें कि यह कार्रवाई अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उनसे संबद्ध संस्थाओं से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई है. अल-फलाह ग्रुप की जांच 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके से जुड़े मामले में भी चल रही है.
ईडी के अनुसार, एजेंसी पहले ही 17 जनवरी को जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी. अब तक की जांच में सामने आया है कि जमीन को धोखाधड़ी से हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया.
एजेंसी का आरोप है कि सिद्दीकी ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी कागज तैयार करवाए और उनके जरिए दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मदनपुर खादर गांव में स्थित खसरा नंबर 792 की जमीन को अवैध तरीके से अपने नाम कराया. यह जमीन करीब 1.146 एकड़ है और इसकी मौजूदा कीमत लगभग 45 करोड़ रुपए बताई जा रही है.
ईडी ने यह भी कहा कि दस्तावेजों में जमीन की कीमत 75 लाख रुपए दिखाई गई, जबकि असली लेन-देन इससे कहीं ज्यादा होने की आशंका है. जांच एजेंसियां अब पूरे पैसों के लेन-देन का पता लगाने और इस मामले में शामिल अन्य लोगों व संपत्तियों की पहचान करने में जुटी हैं.
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एमएस/