
Lucknow, 17 फरवरी . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने हिंदू समाज से संगठित और सशक्त होने का आह्वान करते हुए कहा कि हमको किसी से खतरा नहीं, लेकिन सावधान रहना आवश्यक है.
मोहन भागवत ने Lucknow के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित करते हुए घटती हिंदू जनसंख्या, कथित जबरन मतांतरण और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर चिंता जताई.
उन्होंने कहा कि समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होने पर वह भविष्य में कमजोर हो जाता है, इसलिए परिवारों को इस विषय में जागरूक किया जाना चाहिए.
भागवत ने हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए लालच और जबरदस्ती हो रहे मतांतरण पर रोक लगाने की बात कही. उन्होंने कहा कि घर वापसी का काम तेज होना चाहिए. जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा.
उन्होंने बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए कहा कि घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा. उन्हें रोजगार नहीं देना है. उन्होंने कहा कि हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए. वैज्ञानिकों के हवाले से उन्होंने कहा कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है. यह बात हमारे परिवारों में नवदंपतियों को बताई जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि विवाह की सही आयु 19 से 25 वर्ष है. विवाह का उद्देश्य सृष्टि आगे चले, यह होना चाहिए, वासना पूर्ति नहीं. इसी भावना से कर्तव्य बोध आता है.
उन्होंने कहा कि सद्भाव ना रहने से भेदभाव होता है. हम सभी एक देश, एक मातृभूमि के पुत्र हैं. मनुष्य होने के नाते हम सब एक हैं. एक समय भेद नहीं था, लेकिन समय चक्र के चलते भेदभाव की आदत पड़ गई है, जिसे दूर करना होगा. सनातन विचारधारा सद्भाव की विचारधारा है. जो विरोधी हैं, उन्हें मिटाना है, ऐसा हम नहीं मानते. एक ही सत्य सर्वत्र है. इस दर्शन को समझ कर आचरण में लाने से भेदभाव समाप्त होगा.
मोहन भागवत ने आगे कहा कि घर-परिवार का आधार मातृशक्ति है. हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को था, लेकिन खर्च कैसे हो, यह माताएं तय करती थीं. मातृशक्ति विवाह के बाद दूसरे घर में आकर सभी को अपना बना लेती है. महिला को हमें अबला नहीं मानना है. वह असुर मर्दिनी है. हमने स्त्री की, प्रकृति की जो कल्पना की, वह बलशाली है. महिलाओं को आत्म का प्रशिक्षण होना चाहिए. पश्चिम में महिलाओं का स्तर पत्नी से है. हमारे यहां उन्हें माता माना जाता है. उनका सौंदर्य नहीं, वात्सल्य देखा जाता है.
यूजीसी गाइडलाइन को लेकर किए गए एक प्रश्न के जवाब में सरसंघचालक ने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए. यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है. इस पर दोनों पक्ष की अपनी-अपनी राय है. जातियां झगड़े का कारण नहीं बननी चाहिए. समाज में अपनेपन का भाव होगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी. जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुक कर ऊपर उठाना पड़ेगा. सभी अपने हैं, यह भाव मन में होना चाहिए. संघर्ष से नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है. एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए.
भागवत ने कहा कि India निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा. विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान India के पास ही है.
उन्होंने समाज की सज्जन शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि बस्ती स्तर पर सामाजिक सद्भाव से जुड़ी बैठकें नियमित होनी चाहिए. हम आपस में मिलेंगे तो गलतफहमियां दूर होंगी. इस प्रकार की बैठकों में रूढ़ियों से मुक्त होने पर चर्चा होनी चाहिए. जो समस्याएं सामने आएं, उनको दूर करने का प्रयास होना चाहिए. जो दुर्बल है, उनकी सहायता करना चाहिए.
भागवत ने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं. इससे हमें सावधान रहना होगा. एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा. एक दूसरे के दुख दर्द में शामिल होना होगा.
कार्यक्रम में सिख, बौद्ध, और जैन समाज के साथ ही रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम, और ब्रह्म विद्या निकेतन सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए.
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विकेटी/डीकेपी