असम चुनाव में ‘फर्जीवाड़ा टूलकिट’ को लेकर कांग्रेस पर बरसे मंत्री पियूष हजारिका

गुवाहाटी, 30 अप्रैल . असम Government के कैबिनेट मंत्री पियूष हजारिका ने Thursday को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए 2026 असम विधानसभा चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की. उन्होंने इस पूरे मामले को खेड़ा की जालसाजी करार दिया.

social media मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए हजारिका ने कहा कि लोगों को अदालत में हुई बहस का ट्रांसक्रिप्ट पढ़ना चाहिए, ताकि समझ सकें कि यह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से ऐसे चुनाव को प्रभावित करने की साजिश थी, जिसे वह हारने जा रही थी.

उन्होंने दावा किया कि विपक्ष पहले भी ऐसी रणनीति अपना चुका है. उनके मुताबिक, 2024 Lok Sabha चुनाव के दौरान भी कथित तौर पर एडिटेड वीडियो वायरल किए गए थे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लगा कि वही “टूलकिट” 2026 में असम में भी काम करेगी, लेकिन यह कोशिश कुछ ही घंटों में बेनकाब हो गई.

हजारिका ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ओर से अदालत में दिए गए तर्क विवादित दस्तावेजों की सत्यता पर आधारित नहीं थे. उनका आरोप है कि बचाव पक्ष ने मामले को Political प्रतिशोध बताकर असली मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की.

उन्होंने कहा कि इस मामले में शामिल सभी कथित साजिशकर्ताओं को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए और सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि कोई भी Political दल “फर्जीवाड़े और जालसाजी” के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश न करे.

हजारिका की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब Supreme Court ने Thursday को पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया. खेड़ा ने असम Police द्वारा दर्ज First Information Report के संबंध में अग्रिम जमानत की मांग की है.

यह मामला Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा द्वारा गुवाहाटी क्राइम ब्रांच थाने में दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि खेड़ा ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि उनके पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और विदेशों में वित्तीय हित जुड़े हुए हैं.

First Information Report में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें चुनाव से जुड़े झूठे बयान, धोखाधड़ी, जालसाजी, सार्वजनिक रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल, अपमान और मानहानि जैसी धाराएं शामिल हैं.

इससे पहले खेड़ा ने तेलंगाना हाई कोर्ट का रुख किया था, जहां उन्हें 10 अप्रैल को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी. बाद में Supreme Court ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी. इसके बाद खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था. हाई कोर्ट ने कहा था कि यह मामला सिर्फ मानहानि का नहीं है और दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है.

डीएससी

Leave a Comment