
तेहरान, 27 अप्रैल . ईरान और अमेरिका के मध्य तनाव कम करने के उद्देश्य से Pakistan की मध्यस्थता में युद्धविराम (सीजफायर) को लेकर वार्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है. इस दीर्घकालिक गतिरोध को समाप्त करने के लिए Pakistan ने स्वयं को एक मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत किया है.
Pakistan इस राजनयिक पहल के माध्यम से न केवल अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को सुधारने का प्रयास कर रहा है, बल्कि उसे इस प्रक्रिया के बदले आर्थिक सहायता मिलने की भी प्रबल संभावना है. हालांकि, इन प्रयासों के बीच ईरान के भीतर Pakistan की भूमिका को लेकर विश्वसनीयता का संकट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. ईरान के सांसद और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति आयोग’ के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने भी Pakistan की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए उसकी निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया है.
रेजाई ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “Pakistan हमारा अच्छा दोस्त और पड़ोसी है, लेकिन वह बातचीत के लिए सही मध्यस्थ नहीं है और उसमें मध्यस्थता के लिए जरूरी विश्वसनीयता नहीं है. वे हमेशा ट्रंप के फायदों का ध्यान रखते हैं और अमेरिकियों की मर्जी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहते.”
ईरानी नेता ने आगे कहा, “उदाहरण के लिए, वे दुनिया को यह बताने को तैयार नहीं हैं कि अमेरिका ने पहले Pakistan का प्रस्ताव मान लिया था लेकिन फिर अपनी बात से मुकर गया. वे यह नहीं कहते कि लेबनान या ब्लॉक किए गए एसेट्स के मुद्दे पर अमेरिकियों ने कमिटमेंट किए थे लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया. एक मीडिएटर को बिना किसी भेदभाव के होना चाहिए, हमेशा एक तरफ नहीं झुकना चाहिए.”
Pakistan का झुकाव इस स्थिति में अमेरिकी की तरफ साफ जाहिर है. इसका ताजा उदाहरण तब देखने को मिला, जब दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के लिए सीजफायर की घोषणा की गई थी.
Pakistan के पीएम शहबाज शरीफ के एक्स हैंडल पर जो पोस्ट किया गया, उसमें लिखा था, “ड्राफ्ट- एक्स पर Pakistan के पीएम का मैसेज.” हालांकि इस पोस्ट को एडिट कर दिया गया था, लेकिन एडिटेड हिस्ट्री से इसका खुलासा हो गया. इससे एक बात साफ हो गई थी कि Pakistan के पीएम के एक्स हैंडल पर जो भी पोस्ट किया गया, उसमें शब्द किसी और के थे, बस आवाज Pakistanी पीएम की थी.
इस पोस्ट के बाद ये अटकलें और तेज हो गई कि Pakistan अमेरिका के इशारे पर मध्यस्थता का काम कर रहा है.
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केके/एएस