समुद्री विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी से मजबूत होगी भारत की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार: जितेंद्र सिंह

New Delhi, 17 जनवरी . केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने Saturday को कहा कि समुद्री विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी को एक साथ जोड़ने से India की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के अवसरों को मजबूत किया जा सकता है.

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह बात अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित अटल सेंटर फॉर ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर आइलैंड्स (एसीओएसटीआई) के दौरे के दौरान कही. इस दौरान उन्होंने ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने और स्थानीय लोगों की आजीविका बढ़ाने से जुड़ी कई समुद्री तकनीकी परियोजनाओं की शुरुआत और समीक्षा की.

मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे India दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे भविष्य में देश की आर्थिक तरक्की का बड़ा हिस्सा अप्रयुक्त समुद्री संसाधनों से आएगा.

उन्होंने बताया कि Government का ब्लू इकोनॉमी पर विशेष ध्यान Prime Minister Narendra Modi के इस दृष्टिकोण को दर्शाता है कि देश का विकास केवल मुख्य भूमि तक सीमित न होकर द्वीपों और तटीय क्षेत्रों को साथ लेकर किया जाना चाहिए.

डॉ. सिंह ने कहा कि समुद्री संसाधन अब तक कम खोजे गए हैं, लेकिन आने वाले समय में ये India की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे, खासकर तब जब जमीन पर मौजूद पारंपरिक संसाधन धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं. ब्लू इकोनॉमी से रोजगार बढ़ेगा, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, पर्यावरण की रक्षा होगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी.

उन्होंने बताया कि India उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास बायोटेक्नोलॉजी के लिए अलग नीति है, जिसे बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) कहा जाता है. समुद्री जैव संसाधनों से प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प, नई दवाइयां और मूल्यवान जैव उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं.

डॉ. सिंह ने कहा कि ऐसे प्रयासों से एक साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और बायोइकोनॉमी को मजबूती मिलेगी.

उन्होंने यह भी बताया कि गैर-पशु आधारित खाद्य उत्पाद, समुद्री पोषण के नए विकल्प, कचरे से उपयोगी चीजें बनाने की तकनीक और निर्यात के लिए समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्र तेजी से उभर रहे हैं. खासतौर पर यूरोप में इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है.

मंत्री ने जोर देकर कहा कि स्वयं सहायता समूहों और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना जरूरी है, ताकि ये योजनाएं परिवारों की आमदनी बढ़ाने में मदद करें और ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ की सोच को आगे बढ़ाया जा सके.

उन्होंने कहा कि यदि सीएसआईआर और बायोटेक्नोलॉजी शोध संस्थानों जैसे संगठनों के साथ मिलकर काम किया जाए तो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह India की ब्लू इकॉनमी का एक बड़ा केंद्र बन सकता है.

मंत्री ने भरोसा दिलाया कि Government इस क्षेत्र के साथ लगातार जुड़ी रहेगी और इन प्रयासों से द्वीपों को लंबे समय तक वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक लाभ मिलेंगे.

डीबीपी/डीकेपी

Leave a Comment