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Friday, 30 October 2026
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शिमला के संजौली में तड़के 4 बजे भूस्खलन; मलबे की चपेट में आईं कई इमारतें, लोगों में दहशत

शिमला के संजौली में तड़के 4 बजे भूस्खलन; मलबे की चपेट में आईं कई इमारतें, लोगों में दहशत

शिमला, 11 जुलाई . राजधानी शिमला के संजौली कॉलेज के समीप स्थित बोथवेल क्षेत्र में Saturday तड़के हुए भारी भूस्खलन से इलाके में दहशत फैल गई. सुबह करीब चार बजे हुए इस भूस्खलन के समय अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे. घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन तीन-चार रिहायशी मकानों पर खतरा मंडरा रहा है.

भूस्खलन के बाद स्थानीय लोग घरों से बाहर निकल आए और बारिश के बीच खुले में खड़े होकर प्रशासनिक सहायता का इंतजार करते रहे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार सूचना देने के बाद Police मौके पर पहुंची और एहतियात के तौर पर प्रभावित परिवारों को मकान खाली करने की सलाह दी. हालांकि प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, जिससे वे असमंजस और भय की स्थिति में हैं.

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि सुबह से पार्षद, विधायक, मेयर और अन्य जनप्रतिनिधियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया और न ही कोई मौके पर पहुंचा. लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत, सुरक्षित ठहरने की व्यवस्था और प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है.

भूस्खलन के कारण संजौली कॉलेज जाने वाले मार्ग के नीचे सपोर्ट देने वाली दीवार (ढंगा) ढह गई, जिससे मलबा नीचे स्थित मकानों की ओर पहुंच गया. इसके चलते मकानों तक पहुंचने वाला रास्ता भी बीच से टूट गया और लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में एक निजी निर्माण परियोजना के लिए नगर निगम से अनुमति मिलने के बाद पहाड़ी की खुदाई की गई थी. उनका कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण खुदाई वाला हिस्सा कमजोर हो गया, जिससे भूस्खलन हुआ. उन्होंने प्रशासन से निर्माण कार्य तत्काल बंद कराने और पूरे क्षेत्र का विस्तृत भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि मानसून की शुरुआत ही हुई है और यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में और बड़ा भूस्खलन हो सकता है.

गौरतलब है कि 28 जून 2025 को इसी क्षेत्र में भी भीषण भूस्खलन हुआ था. उस दौरान पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें रिहायशी मकानों में जा घुसी थीं तथा कई बच्चे और महिलाएं घरों में फंस गए थे.

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एसएके/एएस

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