
New Delhi, 22 अप्रैल . दिल्ली Government ने एयर पॉल्यूशन से निपटने के लिए एक अहम कदम उठाने की तैयारी की है. पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के नेतृत्व में एडवांस्ड रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट स्टडी शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया.
बैठक में वैज्ञानिकों की टीम ने दिल्ली के एयर क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करने के लिए साइंस-बेस्ड रोडमैप प्रस्तुत किया. इस स्टडी में पीएम10 पर विशेष फोकस रखा जाएगा, ताकि डेटा आधारित फैसले लिए जा सकें. Government ने इस प्रस्ताव को जल्द मंजूरी देने और प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए हैं.
यह स्टडी पांच साल की अवधि के लिए होगी, जिसका उद्देश्य पारंपरिक डेटा विश्लेषण से आगे बढ़कर एयर पॉल्यूशन के स्रोतों की रियल-टाइम पहचान करना है. इससे नीति निर्माताओं को पीक पॉल्यूशन के समय त्वरित निर्णय लेने और लंबे समय में प्रदूषण नियंत्रण उपायों का आकलन करने में मदद मिलेगी.
प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी की सुपर-साइट को फिर से चालू किया जाएगा और इसे एडवांस्ड उपकरणों तथा मोबाइल मॉनिटरिंग यूनिट्स से जोड़ा जाएगा. इसके जरिए एक हाई-रिज़ोल्यूशन एयर क्वालिटी इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा, जो लगातार डेटा उपलब्ध कराएगा.
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि यह स्टडी Government को यह समझने में मदद करेगी कि प्रदूषण के स्रोत क्या हैं, कौन से कारक इसे बढ़ा रहे हैं और कौन से उपाय जमीन पर प्रभावी साबित हो रहे हैं. इसके साथ ही यह एनवायरनमेंट एक्शन प्लान के तहत उठाए गए कदमों के प्रभाव का मूल्यांकन करने में भी सहायक होगी, खासकर सीजनल पॉल्यूशन ट्रेंड्स और हॉटस्पॉट्स के संदर्भ में.
सिरसा ने कहा कि Chief Minister रेखा गुप्ता के नेतृत्व में एयर क्वालिटी सुधार दिल्ली Government की प्राथमिकता है, और यह प्रस्तावित स्टडी इस दिशा में एक मजबूत साइंटिफिक सपोर्ट देगी.
स्टडी की प्रमुख विशेषताओं में रियल-टाइम सोर्स अपॉर्शनमेंट, मोबाइल वैन के जरिए हॉटस्पॉट मॉनिटरिंग, 24×7 सुपर-साइट ऑपरेशन और एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंटेशन शामिल हैं. इसके अलावा लाइव डैशबोर्ड, साप्ताहिक अपडेट, मासिक रिपोर्ट, एमिशन इन्वेंट्री अपडेट और अपविंड-डाउनविंड एनालिसिस भी किया जाएगा.
इस प्रोजेक्ट में सीलोमीटर, जीएचजी एनालाइज़र और मल्टी-चैनल सैंपलर्स जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाएगा, जिससे मौसम और स्थानीय उत्सर्जन के प्रभाव को अलग-अलग समझा जा सके. साथ ही, क्लीन एयर उपायों के क्लाइमेट को-बेनिफिट्स का भी आकलन किया जाएगा.
यह पहल डीपीसीसी स्टाफ के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग का भी हिस्सा होगी, जिसमें इंस्ट्रूमेंट ऑपरेशन, डेटा एनालिसिस, मॉडलिंग और केमिकल कैरेक्टराइजेशन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा.
अधिकारियों के अनुसार, यह स्टडी दिल्ली में प्रदूषण स्रोतों की सटीक पहचान, नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन और भविष्य की रणनीति के लिए मजबूत डेटा बेस तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
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डीएससी