
अगरतला, 12 जुलाई . त्रिपुरा Government ने अगरतला के लिए दो बड़े और लंबे समय तक चलने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए हैं. इनमें 1,000 करोड़ रुपए का बाढ़ से बचाव का प्रोजेक्ट और गोमती नदी का सतही पानी राज्य की राजधानी तक लाने के लिए नदियों को आपस में जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना शामिल है. इन दोनों प्रोजेक्ट का मकसद बाढ़ से निपटने की क्षमता को मजबूत करना और पीने के पानी की लगातार सप्लाई सुनिश्चित करना है.
एक Governmentी कार्यक्रम में Chief Minister माणिक साहा ने कहा कि उनकी Government का लक्ष्य पीने, घरेलू और अन्य जरूरी कामों के लिए ग्राउंड वाटर पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है. इसके लिए वे सतह पर मौजूद पानी (सरफेस वाटर) के टिकाऊ स्रोतों का पता लगा रहे हैं.
अगरतला में एक नए सिरे से तैयार किए गए जलाशय का उद्घाटन करने के बाद मीडिया से बात करते हुए Chief Minister ने कहा कि बाढ़ से बचाव की प्रस्तावित योजना में दो सुरक्षात्मक तटबंध बनाने और तीन अतिरिक्त पंपिंग स्टेशन लगाने की बात है. इससे शहर की जल निकासी व्यवस्था में काफी सुधार होगा और शहरी इलाकों में बाढ़ का खतरा कम होगा.
उन्होंने कहा कि यह योजना फंड की उपलब्धता के आधार पर चरणों में लागू की जाएगी. जुलाई और अगस्त 2024 में त्रिपुरा में आई विनाशकारी बाढ़ का जिक्र करते हुए साहा ने सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने और मौजूदा मानसून सीजन के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.
उन्होंने अधिकारियों को बचाव के उपकरण, नावें और राहत शिविर तैयार रखने; भोजन, पीने का पानी, दवाएं और अन्य जरूरी सामान का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने; चौबीसों घंटे नदी के जल स्तर और तटबंधों पर नजर रखने और जोखिम वाले व निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर चेतावनी जारी करने का निर्देश दिया.
Chief Minister ने कहा कि Government अगरतला से लगभग 60 किलोमीटर दूर गोमती नदी से सतह का पानी लाने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है. इससे राजधानी शहर की आयरन-युक्त भूजल पर निर्भरता कम होगी, जो लंबे समय से पीने के पानी की आपूर्ति प्रणाली के लिए चुनौती बनी हुई है.
साहा के अनुसार, विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को तकनीकी रूप से व्यवहार्य पाया है, क्योंकि अगरतला में पहले से ही पानी वितरण का एक बड़ा नेटवर्क मौजूद है. इससे बहुत कम अतिरिक्त वितरण बुनियादी ढांचे के साथ साफ़ किए गए सतह के पानी की आपूर्ति की जा सकती है.
उन्होंने कहा कि कोई भी अंतिम निर्णय लेने से पहले एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, सालभर गोमती नदी में पानी की उपलब्धता, टिकाऊ ढंग से मोड़े जा सकने वाले पानी की मात्रा और अन्य पर्यावरणीय व इंजीनियरिंग पहलुओं का व्यापक रूप से आकलन किया जाएगा.
Chief Minister ने कहा कि प्रस्तावित नदी-जोड़ो पहल के तहत सबसे पहले गोमती नदी पर विचार किया जाएगा. यदि यह व्यवहार्य पाया जाता है, तो इस अवधारणा को बाद में राज्य की अन्य नदियों के पानी का उपयोग करने के लिए भी बढ़ाया जा सकता है, इससे पहले कि वे पड़ोसी देश बांग्लादेश में बह जाएं.
हालांकि साहा ने स्पष्ट किया कि नदी-जोड़ो प्रस्ताव अभी योजना के चरण में है और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले विस्तृत तकनीकी अध्ययनों के माध्यम से सभी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी. त्रिपुरा में 12 बड़ी और मध्यम नदियां हैं, जिनमें से आठ अलग-अलग जिलों से होकर बहती हैं और फिर पड़ोसी देश बांग्लादेश की बड़ी नदियों में मिल जाती हैं. इन आठ नदियों के अलावा कई नहरों का पानी भी बांग्लादेश में बहकर जाता है.
साहा ने बताया कि पिछली एक बैठक में बांग्लादेश के एक मंत्री ने चिंता जताई थी कि त्रिपुरा से बहने वाली कुछ नहरों का प्रदूषित पानी सीमा के उस पार रहने वाले लोगों में त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर रहा है.
Chief Minister ने कहा, “इसे देखते हुए हमने पड़ोसी देश में जाने से पहले नहर के पानी को साफ करने के लिए एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का फैसला किया है.”
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एससीएच/वीसी