
New Delhi, 31 जुलाई . ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने Friday को संसद में उस संशोधन विधेयक पारित होने पर चिंता जताई, जिसके तहत ‘वंदे मातरम’ का कथित अपमान दंडनीय अपराध बन जाएगा.
एआईएमपीएलबी ने इस कदम को ‘देश की संवैधानिक, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ’ बताया.
बोर्ड के अनुसार, कानून के माध्यम से सभी नागरिकों पर किसी खास धार्मिक अवधारणा या विश्वास को थोपना India के संविधान की मूल भावना के विपरीत है.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने कहा कि कानूनी दबाव के जरिए सभी वर्गों और धार्मिक समुदायों के लिए ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य बनाने की कोई भी कोशिश आपत्तिजनक है और नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर हमला है.
इलियास ने जोर देकर कहा कि मातृभूमि के प्रति प्रेम और मातृभूमि की पूजा दो बिल्कुल अलग-अलग अवधारणाएं हैं.
उन्होंने कहा कि India के संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका अनुसरण करने की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है.
उन्होंने कहा कि इन संवैधानिक सुरक्षा उपायों का स्पष्ट अर्थ है कि किसी भी नागरिक को उसकी धार्मिक मान्यताओं और अंतरात्मा के खिलाफ किसी गीत, नारे, विचारधारा या प्रतीक को अपनाने या उसमें भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने एक बयान में कहा कि मुसलमान अपने देश से बहुत प्यार करते हैं और अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम को अपनी नागरिक और नैतिक जिम्मेदारी का हिस्सा मानते हैं, लेकिन वे देश को देवता या देवी नहीं मान सकते.
उन्होंने केंद्र Government से अपील की कि वह ऐसे कदम न उठाए जो संवेदनशील हों और लोगों को बांटने वाले हों. इसके बजाय, Government को देश की असली समस्याओं – जैसे बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक असमानता और सामाजिक अन्याय – को हल करने पर ध्यान देना चाहिए.
इलियास ने कहा कि एक मजबूत और एकजुट India तभी बन सकता है जब हर नागरिक को समान सम्मान, न्याय और आजादी मिले, जहां किसी की देशभक्ति को उसकी धार्मिक मान्यताओं के नजरिए से न परखा जाए.
–
एमएस/