
Mumbai , 21 अप्रैल . Maharashtra की मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की नेता पंकजा मुंडे Tuesday को उस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं, जिसे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न होने के विरोध में शुरू किया था. इस विधेयक में Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की गारंटी दी गई थी.
पिछले सप्ताह Lok Sabha में बिल को दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के बाद, एनडीए से जुड़ी पार्टियों के नेताओं ने पूरे देश में विरोध मार्च में हिस्सा लिया.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, मंत्री मुंडे ने बिल की हार को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया.
Maharashtra की मंत्री ने कहा, “बड़ी संख्या में महिलाएं हमें मैसेज करके अपनी निराशा जाहिर कर रही हैं. उनका समर्थन करने और इसकी निंदा करने के लिए, हम सड़कों पर उतरेंगे.”
मुंडे ने आगे कहा, “महिलाओं को स्थानीय निकायों में आरक्षण और प्रतिनिधित्व मिला है, लेकिन उन्हें नीति-निर्माण में, Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं में भी आरक्षण मिलना चाहिए.”
बिल की हार के लिए विपक्षी पार्टियों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, “कांग्रेस, Samajwadi Party, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों ने इस बिल का विरोध करके एक पाप किया है.”
मंत्री मुंडे ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने बिल की नाकामी का ‘जश्न’ मनाया.
Maharashtra की मंत्री ने जोर देकर कहा, “इस देश की महिलाएं उनकी तरक्की की राह में आई इस रुकावट को माफ नहीं करेंगी. मेरा मानना है कि भविष्य में, देश की महिलाएं इन (विपक्षी) पार्टियों को नकार देंगी.”
मुंडे ने जोर देकर कहा, “महिलाओं को आरक्षण देना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका अधिकार है.”
उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को ‘नियमों से बंधी प्रक्रिया’ बताया, जो उनके अनुसार, आजादी के समय की तुलना में देश की आबादी में हुई बढ़ोतरी के कारण जरूरी है.
उन्होंने कहा, “इसमें (महिला आरक्षण बिल में) विरोध करने जैसा क्या है?”
इसके अलावा, मुंडे ने विपक्ष पर महिलाओं की तरक्की में रुकावट डालने के लिए यह ‘बहाना’ बनाने का आरोप लगाया.
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए, Maharashtra की मंत्री ने कहा, “पूरे देश में महिलाएं social media और वाट्सअप पर अपना गुस्सा जाहिर कर रही हैं, क्योंकि वे इसे (महिला आरक्षण बिल को रोकना) एक अपमान के तौर पर देख रही हैं.”
मुंडे ने आगे कहा, “इसलिए, हमने (एनडीए ने) उनके गुस्से को आवाज देने का फैसला किया है और आज से, उनके (देश की महिलाओं के) साथ मिलकर इस आंदोलन का हिस्सा बनेंगे. विरोध के तौर पर, हर जगह ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं. महिलाएं खुद ही पहले दिन से अपने वोटों के जरिए करारा जवाब देंगी.”
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एससीएच