
Bhopal , 7 अप्रैल . Madhya Pradesh Government ने बीआर अंबेडकर की जयंती मनाने के लिए 8 अप्रैल से 14 अप्रैल तक चलने वाले एक हफ्ते के कार्यक्रमों का ऐलान किया है.
इसका मकसद सामाजिक सद्भाव और जमीनी स्तर पर लोगों को जोड़ना है. Chief Minister मोहन यादव ने मंत्रिपरिषद की बैठक के दौरान इस फैसले की जानकारी दी.
बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि कार्यक्रमों को जिला मुख्यालयों तक ही सीमित न रखकर, ब्लॉक स्तर तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई जाए.
Tuesday को राज्य Government की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राज्य-स्तरीय कार्यक्रम भिंड में आयोजित किया जाएगा. वहीं, जिला-स्तरीय कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन पर नजर रखने की जिम्मेदारी संबंधित जिलों के प्रभारी मंत्रियों को सौंपी गई है.
बयान में कहा गया है कि इस पहल को केवल एक रस्मी कार्यक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि शासन की व्यापक पहुंच का एक हिस्सा माना जा रहा है. इसके तहत, जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की जरूरतों के हिसाब से कार्यक्रम तैयार करें.
Government ने बताया कि इस कार्यक्रम की तैयारियां जोरों पर हैं, और जिला व ब्लॉक स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा जल्द ही तय कर ली जाएगी.
यहां यह बताना जरूरी है कि Madhya Pradesh Government ग्वालियर में एक ‘अंबेडकर धाम’ का निर्माण करवा रही है, जिसमें बीआर अंबेडकर का एक स्मारक भी शामिल होगा. Government ने हाल ही में इस परियोजना के लिए 20 करोड़ रुपए (दो चरणों में) की राशि मंजूर की है.
Madhya Pradesh Government के एक पिछले बयान के अनुसार, अंबेडकर धाम में एक डिजिटल लाइब्रेरी, संग्रहालय, सभागार और कॉन्फ्रेंस हॉल के साथ-साथ एक विशाल पुस्तकालय जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.
Madhya Pradesh में अंबेडकर का यह दूसरा स्मारक होगा. पहला स्मारक उनके जन्मस्थान इंदौर के महू में स्थापित किया गया था. महू में पहले से ही एक भव्य स्मारक मौजूद है, जहां उनकी जयंती के अवसर पर हर साल ‘अंबेडकर कुंभ’ का आयोजन किया जाता है.
इसी क्रम में Government ने एक दीर्घकालिक सामाजिक एजेंडा भी पेश किया है. इसके तहत, संत रविदास की जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में 31 मार्च, 2027 तक पूरे राज्य में ‘सामाजिक सद्भाव कार्यक्रम’ आयोजित करने की घोषणा की गई है.
इन लगातार घोषणाओं से यह संकेत मिलता है कि राज्य Government इन जयंती समारोहों को अपने निरंतर सामाजिक संदेशों विशेष रूप से समावेश और सद्भाव से जुड़े संदेशों के साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है.
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एएसएच/डीकेपी