मध्य प्रदेश: कांग्रेस ने महिलाओं के लिए आरक्षण के समय पर सवाल उठाया

Bhopal , 15 अप्रैल . Madhya Pradesh में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने Wednesday को महिला आरक्षण बिल के समय और इसे लागू करने के तरीके पर सवाल उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र Government महिलाओं को तुरंत सशक्त बनाने के बजाय इस मुद्दे का इस्तेमाल Political फायदे के लिए कर रही है.

सोनिया गांधी का समर्थन करते हुए सिंह ने कहा कि उनके हालिया हस्तक्षेप से इस बिल में गंभीर कमियां सामने आई हैं, जिसे एक ऐतिहासिक सुधार बताया जा रहा है.

उन्होंने तर्क दिया कि जहां एक ओर Government इस कानून को ऐतिहासिक बता रही है, वहीं इसे लागू करने के साथ जुड़ी शर्तें Government की मंशा पर सवाल खड़े करती हैं.

सिंह ने कहा कि जिस तरह से इस बिल को तैयार किया गया है, उससे साफ पता चलता है कि भाजपा की दिलचस्पी महिलाओं को असल में सशक्त बनाने के बजाय सुर्खियां बटोरने में ज्यादा है. महिलाओं को सालों तक इंतजार करवाना बिल्कुल भी सही नहीं है. इस कानून को, जिसका आधिकारिक नाम ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ है, सितंबर 2023 में संसद के एक विशेष सत्र के दौरान पास किया गया था. यह Lok Sabha और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है. हालांकि, इसका लागू होना अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है. आलोचकों का कहना है कि इन शर्तों की वजह से इसे लागू होने में कई साल की देरी हो सकती है.

सिंह ने बताया कि कांग्रेस ने पहले भी महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई थी. उन्होंने याद दिलाया कि 2010 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) Government के दौरान राज्यसभा में यह बिल पास किया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, जिसने उस समय इस कदम का विरोध किया था, अब इस मुद्दे को नए सिरे से पेश कर रही है, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं कर रही है कि इसे समय पर लागू किया जाए.

उन्होंने आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने के व्यापक Political नतीजों को लेकर भी चिंता जताई. सिंह के अनुसार, इस तरह के कदम से अलग-अलग क्षेत्रों में Political प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है.

उन्होंने कहा कि आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना कोई निष्पक्ष प्रशासनिक कदम नहीं है; इसके Political परिणाम होते हैं. इससे असंतुलन पैदा होने और निष्पक्षता पर सवाल उठने का खतरा है, खासकर उन राज्यों के लिए जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है.

सिंह ने आगे आरोप लगाया कि केंद्र Government का यह रवैया मौजूदा और आने वाले चुनावों से प्रभावित है. उन्होंने कहा कि घोषणाओं में तो साफ तौर पर जल्दबाजी दिख रही है, लेकिन उन्हें लागू करने के तरीके को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है. अगर Government की मंशा वाकई नेक होती, तो वह इसे तुरंत लागू करवाना सुनिश्चित करती.

एमएस/

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