सिर्फ ज्ञान ही काफी नहीं है, जीवनभर सीखते रहना भी जरूरी : उपराष्ट्रपति

तिरुवरूर, 17 अगस्त . उपPresident सी.पी. राधाकृष्णन ने Monday को तिरुवरूर में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ तमिलनाडु के 11वें दीक्षांत समारोह की शोभा बढ़ाई और अपनी जिंदगी के एक अहम पड़ाव तक पहुंचने पर ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को बधाई दी.

छात्रों को संबोधित करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि दीक्षांत समारोह सिर्फ डिग्री मिलने का जश्न नहीं है, बल्कि यह शिक्षा की बदलाव लाने वाली शक्ति, ज्ञान की खोज और उस समर्पण, लगन और हिम्मत का भी जश्न है, जिसकी वजह से छात्र इस अहम पल तक पहुंच पाए हैं.

उन्होंने ग्रेजुएट होने वाले छात्रों के माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी. उन्होंने उनके त्याग को सराहा और कहा कि उन्होंने अपने बच्चों और छात्रों के शानदार भविष्य के लिए अपनी आज की कई सुख-सुविधाओं का त्याग किया है.

तिरुवरूर के महत्व पर जोर देते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह पवित्र शहर, जहां शानदार त्यागराज मंदिर स्थित है, सदियों से आध्यात्मिकता, विद्वता और कलात्मक उत्कृष्टता का केंद्र रहा है. उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि ने संतों, विद्वानों और कर्नाटक संगीत की महान त्रिमूर्ति को जन्म दिया है. उन्होंने कहा कि सच्ची महानता तब आती है, जब संस्कृति, शिक्षा और मूल्य एक साथ फलते-फूलते हैं.

उपPresident ने पिछले 12 वर्षों में उच्च शिक्षा के जबरदस्त विस्तार पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि देश भर में दीक्षांत समारोहों में वे अक्सर पुरुषों की तुलना में ज्यादा महिलाओं को डिग्री और मेडल लेते हुए देखते हैं और इस चलन को एक स्वागत योग्य बदलाव बताते हैं.

उपPresident ने कहा कि आज शिक्षा को केवल परीक्षाओं या अंकों से नहीं मापा जा सकता. उन्होंने कहा, “इसे स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रभावी ढंग से बातचीत करने, मिल-जुलकर काम करने और जीवन भर सीखते रहने की क्षमता से मापा जाना चाहिए.”

उन्होंने तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय की सराहना की कि वह मल्टी-डिसिप्लिनरी शिक्षा, शोध, इनोवेशन और मूल्यों पर आधारित शिक्षा पर जोर देकर इस सोच को अपना रहा है. हाल ही में संसद से पास हुए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक’ का जिक्र करते हुए उपPresident ने कहा कि परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकना और छात्रों के हितों की रक्षा करना सबसे जरूरी है.

वहीं, Jharkhand के Governor के तौर पर अपने कार्यकाल को याद करते हुए सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान Jharkhand Government ने भी ऐसा ही एक विधेयक पास किया था और तत्कालीन Governor के तौर पर उन्होंने तुरंत उस पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे वह कानून बन सका.

उन्होंने कहा, “अच्छे लोगों के हितों की रक्षा के लिए समाज के बुरे तत्वों को सजा मिलनी चाहिए.” उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया.

उपPresident ने ग्रेजुएट होने वाले छात्रों से आग्रह किया कि वे “ज्ञान के उपभोक्ता के बजाय निर्माता, नकल करने वाले के बजाय इनोवेटर और अनुयायी के बजाय लीडर बनें.”

सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के दूरदर्शी नेतृत्व में India ‘विकसित India 2047’ के विजन की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने कामों में “राष्ट्र प्रथम” की भावना को सर्वोपरि रखें और राष्ट्रीय विकास के लिए अपने ज्ञान, कौशल और नेतृत्व क्षमता का इस्तेमाल करें.

उपPresident ने Police और सुरक्षा एजेंसियों से ड्रग्स बेचने वालों और ड्रग्स की समस्या फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा. उन्होंने कहा कि ड्रग्स का सेवन न सिर्फ व्यक्ति की जिंदगी बर्बाद करता है, बल्कि परिवारों और समाज पर भी बुरा असर डालता है और युवाओं को इस समस्या से बचाना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है.

उन्होंने छात्रों से “ड्रग्स को ना कहें” वाली अपनी अपील दोहराई और उन्हें अपने दोस्तों को भी ड्रग्स से दूर रहने के लिए प्रेरित करने को कहा. अपने संबोधन के आखिर में उपPresident ने सभी ग्रेजुएट छात्रों के सफल, संतुष्ट और स्वस्थ जीवन की कामना की और समाज में सार्थक बदलाव लाने का संतोष मिलने की उम्मीद जताई.

दीक्षांत समारोह में कुल 1,103 ग्रेजुएट छात्रों को डिग्रियां दी गईं, जिनमें 50 गोल्ड मेडलिस्ट भी शामिल थे जिन्होंने पढ़ाई-लिखाई में बेहतरीन प्रदर्शन किया था. इन 1,103 ग्रेजुएट छात्रों में से 616 महिलाएं हैं. 50 गोल्ड मेडल में से 37 मेडल महिलाओं ने हासिल किए.

इस मौके पर तमिलनाडु के Governor राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, Lok Sabha सदस्य (नागापट्टिनम) थिरु वी. सेल्वराज, चांसलर प्रो. जी. पद्मनाभन, वाइस-चांसलर सीनियर प्रो. सुलोचना शेखर, फैकल्टी सदस्य, अभिभावक और छात्र भी मौजूद थे.

एसएचके/वीसी

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