कामाख्या एग्जिट पोल: तमिलनाडु में त्रिकोणीय मुकाबला, किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं

चेन्नई, 29 अप्रैल . तमिलनाडु विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद Wednesday को जारी कामाख्या एग्जिट पोल ने राजनीति में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है. सर्वे के अनुसार राज्य में डीएमके नीत गठबंधन, एआईएडीएमके नीत मोर्चा और Actor विजय की नई Political पार्टी टीवीके के बीच कड़ा त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है.

कामाख्या एग्जिट पोल के मुताबिक, डीएमके के नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (डीएमके+) 234 सदस्यीय विधानसभा में 78 से 95 सीटें जीत सकता है.

हालांकि यह आंकड़ा सत्तारूढ़ गठबंधन को बढ़त में दिखाता है, लेकिन बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों से यह काफी पीछे है. ऐसे में Chief Minister एम.के. स्टालिन के लिए सत्ता बरकरार रखना आसान नहीं दिख रहा है.

वहीं, एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन (एआईएडीएमके+), जिसमें भाजपा और अन्य सहयोगी दल शामिल हैं, को 68 से 84 सीटें मिलने का अनुमान है. इससे विपक्ष सत्ता के काफी करीब नजर आ रहा है और पिछले चुनावी प्रदर्शन की तुलना में उसके पुनरुत्थान के संकेत मिल रहे हैं.

एग्जिट पोल के आंकड़े बताते हैं कि अगर सत्ता विरोधी लहर एकजुट हुई, तो इसका फायदा विपक्षी गठबंधन को मिल सकता है और चुनावी समीकरण बदल सकते हैं.

Political गणित में सबसे बड़ा मोड़ Actor से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की मजबूत एंट्री से आया है. टीवीके को 67 से 81 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है.

यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह पार्टी अपने पहले ही चुनाव में शानदार प्रदर्शन करेगी और त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है.

एग्जिट पोल संकेत देता है कि किसी भी एक दल या गठबंधन के लिए अपने दम पर Government बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि कोई भी खेमे को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है.

ऐसी स्थिति में चुनाव बाद गठबंधन, बातचीत और रणनीतिक Political समीकरण Government गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.

Political विश्लेषकों का मानना है कि विजय की पार्टी टीवीके के उभार ने तमिलनाडु की पारंपरिक द्विध्रुवीय राजनीति, यानी डीएमके बनाम एआईएडीएमके मुकाबले को पूरी तरह बदल दिया है.

विजय की एंट्री ने अलग-अलग क्षेत्रों में वोट शेयर को प्रभावित किया है, जिससे मुकाबला और अधिक प्रतिस्पर्धी तथा अप्रत्याशित हो गया है.

तीनों प्रमुख मोर्चों के बीच सीटों का अंतर बहुत ज्यादा नहीं दिख रहा है. ऐसे में वोट प्रतिशत में थोड़ा सा बदलाव भी सीटों के नतीजों में बड़ा असर डाल सकता है.

राज्य की कई विधानसभा सीटों पर कांटे की टक्कर होने का अनुमान है, जिससे अंतिम नतीजों को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया है.

हालांकि एग्जिट पोल मतदाताओं के रुझान की शुरुआती तस्वीर पेश करते हैं, लेकिन उनकी सटीकता को लेकर हमेशा बहस होती रही है.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के आधिकारिक नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे. उसी दिन साफ होगा कि कामाख्या एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं या राज्य कोई चौंकाने वाला जनादेश देता है.

डीएससी

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