
New Delhi, 20 फरवरी . पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा. Supreme Court ने Friday को पश्चिम बंगाल Government और चुनाव आयोग के बीच गतिरोध को देखते हुए यह फैसला सुनाया.
Supreme Court ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि वे अभी सेवारत और कुछ पूर्व एडीजे रैंक के न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर प्रकिया में लोगों की ओर से पेश आपत्तियों और दावों पर फैसला लेने में मदद करने के लिए लगाएं. कोर्ट ने राज्य Government को हाईकोर्ट के साथ सहयोग करने के निर्देश दिए और कहा कि उनके काम करने के लिए माहौल बनाएं.
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में असाधारण हालात के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है. हालांकि, Supreme Court ने माना कि इस निर्देश से नॉर्मल कोर्ट केस की सुनवाई पर असर पड़ सकता है, क्योंकि जजों का समय एसआईआर प्रक्रिया में लग सकता है.
पश्चिम बंगाल की Chief Minister ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर Friday को Supreme Court के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने सुनवाई की.
राज्य की तरफ से एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि 21 फरवरी तक समयसीमा बढ़ाई गई थी, लेकिन 15 फरवरी को ही आयोग ने डॉक्यूमेंट्स अपलोड करना बंद कर दिया. चुनाव आयोग का पक्ष रखते हुए वकील डीएस नायडू ने बंगाल Government पर ऑफिसर मुहैया न करने का आरोप लगाया.
कोर्ट ने पश्चिम बंगाल Government के रवैए पर नाराजगी जताई और कहा कि राज्य Government ईआरओ-एईआरओ के लिए योग्य अधिकारी मुहैया करा पाने में नाकाम रही है.
भड़काऊ और धमकी भरे भाषणों के मामले पर भी Supreme Court ने सख्त टिप्पणी की. सीजेआई ने कहा कि दुर्भाग्य से इस देश में ये (भड़काऊ) सभी बयान चुनाव के दौरान दिए जाते हैं. उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप का एक बुरा माहौल है, जो दो संवैधानिक संस्थाओं चुनाव आयोग और राज्य Government के बीच भरोसे की कमी दिखाता है.
Supreme Court ने Police महानिदेशक को अब तक मिली शिकायतों और उठाए गए कदमों की जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया. इस मामले में मार्च के पहले हफ्ते में अगली सुनवाई होगी.
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डीसीएच/