जयराम रमेश बोले- ‘राहुल गांधी के खुलासों से बढ़ी सरकार की बौखलाहट’, एनटीए और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

New Delhi, 23 जुलाई . कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने नीट मुद्दे पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के खुलासों से Government की बौखलाहट लगातार बढ़ती जा रही है.

जयराम रमेश ने Thursday को ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से देर शाम आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस राहुल गांधी के सीधे खुलासों के जवाब में आई है. यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि Government की बौखलाहट लगातार बढ़ती जा रही है. जेपी नड्डा को इस बचकानी उंगली उठाने की राजनीति से आगे बढ़कर पहले मंत्री प्रधान और Prime Minister की अभूतपूर्व विफलताओं को स्वीकार करना चाहिए.”

कांग्रेस नेता ने कहा कि एनटीए की स्थापना वर्तमान Government ने विशेष रूप से परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए की थी. Government ने जानबूझकर परीक्षा प्रणाली का केंद्रीकरण किया, उसे एनटीए के माध्यम से संचालित किया और विश्वविद्यालयों व राज्यों पर इसे अपनाने का दबाव बनाया. पहले से मौजूद व्यवस्था को खत्म करके एनटीए को खड़ा किया गया. इसके बाद एनटीए लगातार पूरी तरह कॉम्प्रोमाइज और अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह अक्षम साबित हुई.

उन्होंने कहा, “एनटीए की स्थापना के बाद से अब तक इसके कार्यकाल में कम-से-कम 9 बार पेपर लीक हुए हैं. इनमें 2024 की वे घटनाएं भी शामिल हैं, जब अनियमितताओं के कारण एनटीए को कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं. 2024 की भारी विफलता के बाद मंत्री प्रधान ने एनटीए में सुधार का वादा किया था. इसके लिए के. राधाकृष्णन समिति का गठन किया गया, जिसने एनटीए में सुधार के लिए 101 सिफारिशें दीं. लेकिन सुधारों को गंभीरता से लागू करने के बजाय मंत्री प्रधान टालमटोल करते रहे और उन्होंने अविश्वसनीय आत्मसंतोष तथा अहंकार का परिचय दिया.”

जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “एनटीए में महानिदेशक का पद, जो इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्यकारी पद है, 2024 के पेपर लीक से लेकर 2026 के पेपर लीक तक पूरे समय अतिरिक्त प्रभार के रूप में ही अधिकारियों के पास रहा. नतीजतन, एनटीए की निगरानी में नीट-यूजी 2026 का एक और पेपर लीक हुआ और परीक्षा रद्द करनी पड़ी. यहां तक कि इस स्थिति में भी एनटीए और उच्च शिक्षा विभाग ने संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के सामने बेशर्मी से दावा किया कि कोई पेपर लीक नहीं हुआ था. मंत्री प्रधान के लिए सच्चाई से ज्यादा अपनी छवि मायने रखती थी.”

उन्होंने यह भी कहा कि हमेशा की तरह अहंकारी मंत्री प्रधान ने संसद और उसके विवेकपूर्ण सुझावों के प्रति अपना पूर्ण अनादर दिखाते हुए सिर्फ इसलिए शिक्षा संबंधी स्थायी समिति की एनटीए को मजबूत बनाने वाली सिफारिशों को खारिज कर दिया क्योंकि उस समिति में विपक्ष के सदस्य भी शामिल थे. उन्होंने आगे कहा, “देशभर में भारी आक्रोश के बाद भी एनटीए के अधीन आयोजित यूजीसी-नेट समाजशास्त्र 2026 परीक्षा के पेपर लीक और यूजीसी-नेट अंग्रेजी 2026 परीक्षा में अनियमितताओं की खबरें सामने आईं.”

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि जब छात्र पेपर लीक और मोदी Government की शिक्षा नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे, तो Prime Minister और उनके सहयोगी मंत्री प्रधान ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर अभूतपूर्व बर्बरता दिखाई. उनके खिलाफ लाठीचार्ज, वॉटर कैनन, आंसू गैस और खबरों के अनुसार पेलेट गन तथा शॉक बैटन तक का इस्तेमाल किया गया.

उन्होंने कहा, “नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक सिर्फ एक लक्षण है, बीमारी इससे कहीं अधिक गहरी है. देश के छात्रों का गुस्सा मंत्री प्रधान की व्यापक अक्षमता, मोदी Government की बेहद खराब शिक्षा नीतियों और Prime Minister के अहंकार के खिलाफ है.”

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डीसीएच/

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