‘किशन कन्हैया’ के रिलीज को 36 साल हुए पूरे, शिल्पा शिरोडकर बोलीं- ‘ऐसा लगता है जैसे यह कल की ही बात हो’

Mumbai , 9 मार्च . सिनेमा में कुछ ऐसी फिल्में होती हैं जो सालों बीत जाने के बाद भी दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाए रखती हैं. इन फिल्मों को कई बार कलाकार खुद भी याद करते हुए भावुक हो जाते हैं और उन दिनों की यादें साझा करते हैं. ऐसी ही एक याद Actress शिल्पा शिरोडकर ने Monday को साझा की, जब उनकी लोकप्रिय फिल्म ‘किशन कन्हैया’ के रिलीज को 36 साल पूरे हो गए.

इस खास मौके पर शिल्पा शिरोडकर ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर फिल्म का एक पुराना पोस्टर साझा किया. इस पोस्टर में उनके साथ Actor अनिल कपूर और Actress माधुरी दीक्षित भी नजर आ रहे हैं. पोस्टर साझा करते हुए शिल्पा ने लिखा , ”फिल्म को रिलीज हुए भले ही इतने साल बीत चुके हों, लेकिन आज भी ऐसा लगता है जैसे यह सब कल की ही बात हो.”

फिल्म ‘किशन कन्हैया’ की बात करें तो इसका निर्देशन और निर्माण प्रसिद्ध फिल्मकार राकेश रोशन ने किया था. इसकी कहानी लेखक रवि कपूर, मोहन कौल और कादर खान ने मिलकर लिखी थी. यह एक कॉमेडी और एक्शन से भरपूर फिल्म थी, जिसने उस समय दर्शकों को खूब रोमांचित किया. फिल्म में अनिल कपूर ने डबल रोल निभाया, जिसमें वे किशन और कन्हैया नाम के दो अलग-अलग किरदारों में नजर आए थे.

फिल्म की कहानी दो भाइयों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो जन्म के समय अलग हो जाते हैं. कहानी की शुरुआत लीला नाम की एक महिला से होती है, जो दाई का काम करती है. वह और उसका पति भोला राम संतान के सुख से वंचित होते हैं. एक दिन एक अमीर व्यक्ति सुंदरलाल की पत्नी दो बच्चों को जन्म देती है और उस समय दाई का काम लीला ही कर रही होती है. बच्चे की चाह में लीला एक बच्चे को अपने पास रख लेती है और सुंदरलाल से कह देती है कि केवल एक ही बच्चा पैदा हुआ है. जन्म देने के तुरंत बाद सुंदरलाल की पत्नी की मृत्यु हो जाती है.

इसके बाद लीला और उसका पति उस बच्चे का पालन-पोषण करते हैं, जिसका नाम कन्हैया रखा जाता है. दूसरी ओर सुंदरलाल अपने बेटे किशन को अकेले पालता है. बाद में वह कामिनी नाम की महिला से विवाह कर लेता है. कामिनी अपने भाई गेंदामल के साथ घर में रहने लगती है और धीरे-धीरे वे दोनों घर और संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं. किशन को इन्हीं अत्याचारों के बीच बड़ा होना पड़ता है.

किशन ने नहीं पढ़ा-लिखा और अक्सर उससे जबरन कागजों पर अंगूठा लगवाया जाता है. दूसरी ओर कन्हैया का स्वभाव बिल्कुल अलग होता है. वह फिल्मों का बहुत बड़ा शौकीन होता है और खुशमिजाज जिंदगी जीता है. उसकी मुलाकात अंजू नाम की लड़की से होती है. धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं. कहानी में एक रोचक मोड़ यह भी है कि दोनों भाइयों के बीच एक अनजाना भावनात्मक संबंध बना रहता है. जब भी किसी एक को दर्द होता है तो दूसरे को भी उसका एहसास होने लगता है.

आगे चलकर किशन को राधा नाम की एक लड़की से प्यार हो जाता है और दोनों की शादी हो जाती है. इस बीच खलनायक किशन की संपत्ति हड़पने की साजिश रचते हैं और उसे मारने की योजना बनाते हैं.

कहानी के आखिर में कन्हैया को अपने अतीत का सच पता चलता है और वह अपने असली घर पहुंच जाता है. दोनों भाई मिलकर सभी विलेन का सामना करते हैं.

पीके/डीकेपी

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